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सावन 2026: हरिद्वार में स्वामी कैलाशानंद गिरी की विशेष शिव साधना, देशभर से पहुंचेंगे श्रद्धालु
Fri, 24 Jul 2026 04:35 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2026 04:35 PM IST
सार
सावन 2026 के दौरान हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की विशेष शिव साधना, रुद्राभिषेक और वैदिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इनमें शामिल होने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
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निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में भी धर्मनगरी हरिद्वार शिवभक्ति के रंग में रंगी नजर आने वाली है। इस दौरान निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की विशेष शिव साधना, वैदिक अनुष्ठान और लोकमंगल से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहने वाला है। इस दौरान देशभर से बड़ी संख्या में शिवभक्त, संत और श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है।
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शिव साधना और वैदिक अनुष्ठानों का होगा आयोजन
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज लंबे समय से शिव उपासना, वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित हैं। सावन के पूरे माह उनके सान्निध्य में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप और राष्ट्र एवं विश्व कल्याण के लिए वैदिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इन धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकेंगे।
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सावन में देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत और अन्य शुभ तिथियों पर आश्रम में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाता है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्रपाठ और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
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सनातन संस्कृति की झलक
हरिद्वार में आयोजित होने वाले ये धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और सनातन मूल्यों की भी अभिव्यक्ति हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ भारतीय धार्मिक परंपराओं को निकट से देखने और समझने का अवसर मिलता है। सावन 2026 के दौरान हरिद्वार एक बार फिर शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। पूरे सावन माह धर्मनगरी हरिद्वार 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गुंजायमान रहने की संभावना है।