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ED: नारको-टेरर फंडिंग नेटवर्क, 'हिजबुल मुजाहिदीन' के हैंडलर ट्रक के टायर में छिपाकर करते थे ड्रग्स तस्करी
Fri, 24 Jul 2026 04:13 PM IST
नितिन गौतम
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, जम्मू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, जम्मू
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 24 Jul 2026 04:13 PM IST
सार
ईडी ने नारको-टेरर नेटवर्क के गठजोड़ के खिलाफ जम्मू कश्मीर में नौ जगह छापेमारी की है। यह छापेमारी पीएमएलए कानून के तहत की गई है। ईडी की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
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ईडी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जम्मू सब-जोनल ऑफिस ने पंजाब और जम्मू-कश्मीर 'लाइन ऑफ कंट्रोल' के निकट 9 जगहों पर 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत छापेमारी की है। यह कार्रवाई नारको-टेरर फंडिंग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में की गई है। ईडी ने ऐसे 'नारको-टेरर फंडिंग नेटवर्क' का खुलासा किया है, जो कश्मीर में 'हिजबुल मुजाहिदीन' का हैंडलर बनकर आरोपियों की मदद करता था। एक ट्रक के टायर में ड्रग्स के 30 पैकेट छिपाकर लाए जाते थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा इस बाबत मामले दर्ज किए गए थे।
पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के जरिए तस्करी
जांच से पता चला है कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच एक अच्छी तरह से संगठित और कई स्तरों वाला नारको-टेरर फंडिंग नेटवर्क काम कर रहा था। इसमें पंजाब के हैंडलर (सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान) और कुपवाड़ा, कश्मीर (एलओसी के पास) के ऑपरेटिव (सफीर अहमद और कफील अहमद) शामिल थे। हेरोइन की खेप पाकिस्तान स्थित उन हैंडलरों के जरिए तस्करी करके लाई जाती थी जो आतंकवादी संगठन 'हिज़्बुल मुजाहिदीन' से जुड़े थे। ये हैंडलर कश्मीर के आरोपियों (जैसे सफीर अहमद और कफील अहमद) के साथ मिलकर अमरोही बॉर्डर/एलओसी से सटे इलाकों के जरिए भारत में हेरोइन की तस्करी का तालमेल बिठाते थे।
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पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के जरिए तस्करी
जांच से पता चला है कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच एक अच्छी तरह से संगठित और कई स्तरों वाला नारको-टेरर फंडिंग नेटवर्क काम कर रहा था। इसमें पंजाब के हैंडलर (सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान) और कुपवाड़ा, कश्मीर (एलओसी के पास) के ऑपरेटिव (सफीर अहमद और कफील अहमद) शामिल थे। हेरोइन की खेप पाकिस्तान स्थित उन हैंडलरों के जरिए तस्करी करके लाई जाती थी जो आतंकवादी संगठन 'हिज़्बुल मुजाहिदीन' से जुड़े थे। ये हैंडलर कश्मीर के आरोपियों (जैसे सफीर अहमद और कफील अहमद) के साथ मिलकर अमरोही बॉर्डर/एलओसी से सटे इलाकों के जरिए भारत में हेरोइन की तस्करी का तालमेल बिठाते थे।
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कुपवाड़ा स्थित कफ़ील अहमद का मकान
- फोटो : अमर उजाला
31 किलोग्राम वजन वाले हेरोइन के 30 पैकेट
एक मामले में, हेरोइन के 35 पैकेट बरामद किए गए। इनमें से 5 पैकेट स्थानीय स्तर पर बांटे या रखे गए। 30 पैकेट श्रीनगर ले जाने के लिए ट्रक के टायर में छिपाकर रखे गए थे। यह खेप श्रीनगर में पंजाब के कैरियर सरबजीत सिंह और हनी बसरा को सौंपी गई थी, जिन्हें बाद में सितंबर 2023 में बनिहाल में लगभग 31 किलोग्राम वज़न वाले हेरोइन के 30 पैकेट के साथ पकड़ा गया था। सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान के नेतृत्व वाले पंजाब-साइड नेटवर्क ने हेरोइन की ढुलाई और वितरण के लिए जाली दस्तावेज़, नकली वाहन कागजात, छिपे हुए खाने (कैविटी), कई वाहनों और नकद लेन-देन का इस्तेमाल किया।
कश्मीर में मौजूद लोगों से हेरोइन लेते थे
सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान (सतनाम सिंह के बेटे) के नेतृत्व वाले एक संगठित नेटवर्क के ज़रिए श्रीनगर/जम्मू-कश्मीर से पंजाब तक हेरोइन की तस्करी के कई और मामले सामने आए हैं। इस नेटवर्क में कैरियर और ट्रांसपोर्टर कश्मीर में मौजूद लोगों से हेरोइन की खेप (कुल मिलाकर 60 किलोग्राम से ज़्यादा) इकट्ठा करते थे। उसे आगे बेचने और बांटने के लिए पंजाब पहुंचाते थे। हेरोइन की बिक्री से हुई कमाई का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था। ईडी की जांच में बैंकिंग लेन-देन का पता चला, जिसमें मंजीत सिंह उर्फ मान के खातों में बड़ी रकम नकद जमा करना और सरबजीत सिंह के खाते में नकद जमा करना शामिल है।
एक मामले में, हेरोइन के 35 पैकेट बरामद किए गए। इनमें से 5 पैकेट स्थानीय स्तर पर बांटे या रखे गए। 30 पैकेट श्रीनगर ले जाने के लिए ट्रक के टायर में छिपाकर रखे गए थे। यह खेप श्रीनगर में पंजाब के कैरियर सरबजीत सिंह और हनी बसरा को सौंपी गई थी, जिन्हें बाद में सितंबर 2023 में बनिहाल में लगभग 31 किलोग्राम वज़न वाले हेरोइन के 30 पैकेट के साथ पकड़ा गया था। सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान के नेतृत्व वाले पंजाब-साइड नेटवर्क ने हेरोइन की ढुलाई और वितरण के लिए जाली दस्तावेज़, नकली वाहन कागजात, छिपे हुए खाने (कैविटी), कई वाहनों और नकद लेन-देन का इस्तेमाल किया।
कश्मीर में मौजूद लोगों से हेरोइन लेते थे
सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान (सतनाम सिंह के बेटे) के नेतृत्व वाले एक संगठित नेटवर्क के ज़रिए श्रीनगर/जम्मू-कश्मीर से पंजाब तक हेरोइन की तस्करी के कई और मामले सामने आए हैं। इस नेटवर्क में कैरियर और ट्रांसपोर्टर कश्मीर में मौजूद लोगों से हेरोइन की खेप (कुल मिलाकर 60 किलोग्राम से ज़्यादा) इकट्ठा करते थे। उसे आगे बेचने और बांटने के लिए पंजाब पहुंचाते थे। हेरोइन की बिक्री से हुई कमाई का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था। ईडी की जांच में बैंकिंग लेन-देन का पता चला, जिसमें मंजीत सिंह उर्फ मान के खातों में बड़ी रकम नकद जमा करना और सरबजीत सिंह के खाते में नकद जमा करना शामिल है।
एसबीएस नगर स्थित सतनाम सिंह और मंजीत का मकान
- फोटो : अमर उजाला
दस्तावेज और बैंक खाते के रिकॉर्ड बरामद
नारको-टेरर फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ ईडी की छापेमारी, खासकर बॉर्डर/एलओसी से सटे इलाकों में, काफी अहम है, क्योंकि ये सीमा-पार नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन से जुड़े स्थानीय मददगारों और सप्लाई के सोर्स (स्रोत) से जुड़ी लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाती है। छापेमारी के दौरान, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत कई अहम दस्तावेज और बैंक खाते के रिकॉर्ड बरामद और जब्त किए गए। साथ ही, कई बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया है, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 49.9 लाख रुपये जमा थे।
नारको-टेरर फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ ईडी की छापेमारी, खासकर बॉर्डर/एलओसी से सटे इलाकों में, काफी अहम है, क्योंकि ये सीमा-पार नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन से जुड़े स्थानीय मददगारों और सप्लाई के सोर्स (स्रोत) से जुड़ी लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाती है। छापेमारी के दौरान, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत कई अहम दस्तावेज और बैंक खाते के रिकॉर्ड बरामद और जब्त किए गए। साथ ही, कई बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया है, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 49.9 लाख रुपये जमा थे।