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Cabinet: आंध्र-कर्नाटक के बीच बनेगा आर्थिक गलियारा, 4,294 करोड़ रुपये की योजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी
Fri, 24 Jul 2026 04:20 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2026 04:20 PM IST
सार
केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत 4,294 करोड़ रुपये का आंध्र-कर्नाटक आर्थिक गलियारा दक्षिण भारत के औद्योगिक विकास के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल 31 लाख मानव-दिवस का रोजगार पैदा होगा और 149 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक बचत होगी, बल्कि यह हर साल 27 लाख पेड़ों के बराबर कार्बन उत्सर्जन कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
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कैबिनेट के फैसले
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे के विकास को हरी झंडी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी पहल के लिए कुल 4,294 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश को मंजूरी मिली है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट के इस फैसले से दोनों राज्यों में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
वैष्णव ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम किया जाएगा। पहली परियोजना बल्लारी-गुंटकल के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण की है, जिसके लिए 1,264 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह रेलवे लाइन माल ढुलाई की क्षमता में बड़ा इजाफा करेगी। वहीं दूसरी प्रमुख परियोजना भव्य रसायन योजना है, जिसके लिए 3,030 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पहल क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने में मदद करेगी।
किन उद्योगों को होगा बड़ा फायदा?
यह आर्थिक गलियारा बल्लारी-होसपेट क्षेत्र के स्टील और सीमेंट क्लस्टरों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। इससे भारी उद्योगों के कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन काफी तेज और आसान हो जाएगा। इसके अलावा, यह गलियारा प्रमुख समुद्री बंदरगाहों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक पहुंच को भी सुगम बनाएगा। इस रेलवे विस्तार से हर साल 1.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी, जिससे व्यापार और वाणिज्य को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
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परियोजना से जुड़ी पांच बड़ी बातें
यह परियोजना न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी एक मिसाल कायम करेगी। इस गलियारे के शुरू होने से हर साल करीब 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन कम होगा, जो कि लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरण संरक्षण का काम करेगा। व्यापारिक दृष्टि से देखें तो इस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रति वर्ष 149 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत बचेगी। माल ढुलाई का खर्च घटने से स्थानीय उद्योगों के उत्पादों की बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में भारी सुधार होगा।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: राहुल का दावा- प्रदर्शन में युवक पर चलाई गई पैलेट गन, धर्मेंद्र प्रधान 'अपराधी शिक्षा मंत्री'
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वैष्णव ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम किया जाएगा। पहली परियोजना बल्लारी-गुंटकल के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण की है, जिसके लिए 1,264 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह रेलवे लाइन माल ढुलाई की क्षमता में बड़ा इजाफा करेगी। वहीं दूसरी प्रमुख परियोजना भव्य रसायन योजना है, जिसके लिए 3,030 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पहल क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने में मदद करेगी।
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किन उद्योगों को होगा बड़ा फायदा?
यह आर्थिक गलियारा बल्लारी-होसपेट क्षेत्र के स्टील और सीमेंट क्लस्टरों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। इससे भारी उद्योगों के कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन काफी तेज और आसान हो जाएगा। इसके अलावा, यह गलियारा प्रमुख समुद्री बंदरगाहों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक पहुंच को भी सुगम बनाएगा। इस रेलवे विस्तार से हर साल 1.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी, जिससे व्यापार और वाणिज्य को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
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परियोजना से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- कुल बजट आवंटन: आंध्र-कर्नाटक कॉरिडोर के लिए केंद्र सरकार ने 4,294 करोड़ रुपये के कुल निवेश को मंजूरी दी।
- रेलवे लाइन विस्तार: बल्लारी-गुंटकल मार्ग पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए 1,264 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- भव्य रसायन योजना: औद्योगिक रफ्तार बढ़ाने वाली इस योजना के लिए 3,030 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
- भारी रोजगार सृजन: निर्माण और परिचालन के दौरान करीब 31 लाख मानव-दिवस का रोजगार उत्पन्न होगा।
- अतिरिक्त माल ढुलाई: इस गलियारे की मदद से प्रति वर्ष 1.6 करोड़ टन अधिक माल की आवाजाही हो सकेगी।
यह परियोजना न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी एक मिसाल कायम करेगी। इस गलियारे के शुरू होने से हर साल करीब 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन कम होगा, जो कि लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरण संरक्षण का काम करेगा। व्यापारिक दृष्टि से देखें तो इस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रति वर्ष 149 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत बचेगी। माल ढुलाई का खर्च घटने से स्थानीय उद्योगों के उत्पादों की बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में भारी सुधार होगा।
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