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Supreme Court: 'बिना शर्त हाईकोर्ट में माफी मांगें', जज के साथ बहस को लेकर वकील को शीर्ष कोर्ट का निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 Jan 2026 03:16 PM IST
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सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के वकील महेश तिवारी को हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी देने का आदेश दिया, क्योंकि अदालत में उन्होंने कथित तौर पर जज से 'हद पार मत करिए' कहा था। क्या है मामला, पढ़िए रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड के एक वकील को हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगने को कहा। शीर्ष कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। दरअसल, अदलात की कार्यवाई के दौरान वकील ने कथित तौर पर जज से कहा था- हद पार मत करिए। बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिका का निपटारा किया। उन्होंने वकील महेश तिवारी को पांच जजों की हाईकोर्ट की बेंच के सामने बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने की अनुमति दी। वकील के खिलाफ पिछले साल अक्तूबर में अवमानना का नोटिस जारी किया गया था। शीर्ष कोर्ट ने हाईकोर्ट से माफी पर सहानुभूतिपूर्व विचार करने का अनुरोध किया।
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शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा?
शीर्ष कोर्ट की बेंच ने कहा, हम याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफीनामा प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए इस मामले का निपटारा करते हैं। हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह माफीनामा पर सहानुभूति के साथ विचार करे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे पेश हुए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बेहद पश्चाताप कर रहा है और बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है। हालांकि, बेंच ने वकील के आचर पर कड़ी आपत्ति जताई।
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सीजेआई ने क्या टिप्पणी की?
सीजेआई ने वकील के विरोध पर टिप्पणी करते हुए कहा, वह जजों के सामने इसका स्पष्टीकरण क्यों नहीं सकते? यह उनका हठधर्मी स्वभाव है। उन्हें जजों का सामना करने दीजिए। उन्हें स्पष्टीकरण देने दीजिए। अगर वह अपनी आंखें दिखाना चाहते हैं, तो दिखाएं, फिर हम देखेंगे। हम जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है।
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चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिका का निपटारा किया। उन्होंने वकील महेश तिवारी को पांच जजों की हाईकोर्ट की बेंच के सामने बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने की अनुमति दी। वकील के खिलाफ पिछले साल अक्तूबर में अवमानना का नोटिस जारी किया गया था। शीर्ष कोर्ट ने हाईकोर्ट से माफी पर सहानुभूतिपूर्व विचार करने का अनुरोध किया।
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शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा?
- सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि आपराधिक अवमानना नोटिस से व्यथित याचिकाकर्ता हमारे सामने हाजिर हैं।
- सुनवाई के दौरान बताया गया कि याचिकाकर्ता का इरादा माननीय जज का अपमान करना या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना नहीं था।
- वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता अपने किए पर गहराई से खेद प्रकट कर रहा है। याचिकाकर्ता बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है।
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा?
शीर्ष कोर्ट की बेंच ने कहा, हम याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफीनामा प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए इस मामले का निपटारा करते हैं। हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह माफीनामा पर सहानुभूति के साथ विचार करे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे पेश हुए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बेहद पश्चाताप कर रहा है और बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है। हालांकि, बेंच ने वकील के आचर पर कड़ी आपत्ति जताई।
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सीजेआई ने क्या टिप्पणी की?
सीजेआई ने वकील के विरोध पर टिप्पणी करते हुए कहा, वह जजों के सामने इसका स्पष्टीकरण क्यों नहीं सकते? यह उनका हठधर्मी स्वभाव है। उन्हें जजों का सामना करने दीजिए। उन्हें स्पष्टीकरण देने दीजिए। अगर वह अपनी आंखें दिखाना चाहते हैं, तो दिखाएं, फिर हम देखेंगे। हम जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है।
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