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Supreme Court: सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, सशर्त गाजीपुर जाने की मिली इजाजत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 16 May 2025 02:19 PM IST
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सार
सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को अपने निर्वाचन क्षेत्र करने का दौरा किया है। इस दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि अब्बास अंसारी का गाजीपुर में तीन रातों से अधिक का प्रवास नहीं होगा और गाजीपुर में रहने के दौरान वह कोई सार्वजनिक बैठक नहीं करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी को उनके निर्वाचन क्षेत्र मऊ में जाने के दौरान उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में उनके घर में रहने की अनुमति दे दी है। जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने उस आदेश को संशोधित किया जिसमें अंसारी को दी गई अंतरिम जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गई थीं। पीठ ने स्पष्ट किया कि अब्बास अंसारी का गाजीपुर में तीन रातों से अधिक का प्रवास नहीं होगा और गाजीपुर में रहने के दौरान वह कोई सार्वजनिक बैठक नहीं करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कहा था
बता दें कि, यूपी गैंगस्टर्स एक्ट के मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज राहत दी है। इस मामले में इससे पहले न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मुख्तार अंसारी के बेटे अंसारी को लखनऊ में अपने सरकारी आवास में रहने और मऊ में अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने से पहले अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेने का निर्देश दिया है। पीठ ने अंसारी से कहा कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना उत्तर प्रदेश न छोड़ें और अदालतों में पेश होने से एक दिन पहले पुलिस अधिकारियों को सूचित करें।
यह भी पढ़ें - Kerala: महिला वकील से मारपीट के मामले ने पकड़ा तूल; तीन दिन बाद गिरफ्तार वरिष्ठ वकील 14 दिन की हिरासत में
शीर्ष अदालत ने अंसारी द्वारा जमानत शर्तों के अनुपालन पर पुलिस से छह सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने कहा कि उन्हें गैंगस्टर अधिनियम मामले को छोड़कर सभी आपराधिक मामलों में जमानत दी गई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी
पिछले साल 18 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन पर और कुछ अन्य लोगों पर वित्तीय एवं अन्य लाभ के लिए गिरोह बनाने का आरोप लगाया गया था।
यह भी पढ़ें - SC: बंगाल के कर्मचारियों को 25 प्रतिशत डीए देने का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने का दिया समय
जबरन वसूली और मारपीट का आरोप
चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को अंसारी, नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा दो, तीन के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर जबरन वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया था। इस मामले में उन्हें छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कहा था
बता दें कि, यूपी गैंगस्टर्स एक्ट के मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज राहत दी है। इस मामले में इससे पहले न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मुख्तार अंसारी के बेटे अंसारी को लखनऊ में अपने सरकारी आवास में रहने और मऊ में अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने से पहले अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेने का निर्देश दिया है। पीठ ने अंसारी से कहा कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना उत्तर प्रदेश न छोड़ें और अदालतों में पेश होने से एक दिन पहले पुलिस अधिकारियों को सूचित करें।
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शीर्ष अदालत ने अंसारी द्वारा जमानत शर्तों के अनुपालन पर पुलिस से छह सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने कहा कि उन्हें गैंगस्टर अधिनियम मामले को छोड़कर सभी आपराधिक मामलों में जमानत दी गई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी
पिछले साल 18 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन पर और कुछ अन्य लोगों पर वित्तीय एवं अन्य लाभ के लिए गिरोह बनाने का आरोप लगाया गया था।
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जबरन वसूली और मारपीट का आरोप
चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को अंसारी, नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा दो, तीन के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर जबरन वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया था। इस मामले में उन्हें छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
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