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अचानक हंसने-रोने लगती थीं छात्राएं: आत्माओं के नाराज होने का दावा, अमरावती के आवासीय स्कूल का क्या है मामला?
Sun, 16 Aug 2026 07:47 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, अमरावती
पीटीआई, अमरावती
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 16 Aug 2026 07:47 PM IST
सार
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक आदिवासी आवासीय विद्यालय में कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद अंधविश्वास और डर का माहौल बन गया। छात्राओं के बिना वजह रोने और हंसने की घटनाओं के बाद छात्रावास में आत्माओं के होने की अफवाह फैल गई। इसके चलते करीब 600 छात्र वहां से चले गए।
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अमरावती के आवासीय स्कूल में अफवाह से फैला डर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में एक सरकारी आदिवासी छात्रावास से करीब 600 छात्रों के चले जाने के बाद प्रशासन एक असामान्य स्थिति से जूझ रहा है। छात्रों का दावा है कि छात्रावास की कुछ छात्राओं पर "आत्माओं का साया" है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 22 जुलाई को शुरू हुआ, जब चार छात्राएं असामान्य व्यवहार करने लगीं। वे बिना कारण रोने और हंसने लगीं। अधिकारियों का मानना है कि यह मानसिक तनाव से जुड़ी समस्या हो सकती है।
उत्तरी महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र के चिखलदरा तहसील के डोमा गांव स्थित इस आदिवासी आवासीय विद्यालय में 810 छात्र-छात्राएं रहते हैं। यह स्कूल मुंबई से 700 किलोमीटर से अधिक दूर है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही यह अफवाह फैल गई कि छात्राओं पर किसी आत्मा का साया है। इसके बाद कुछ ही दिनों में करीब 600 छात्र कथित तौर पर "भूतिया" छात्रावास छोड़कर चले गए। छात्रावास का संचालन जनजातीय विकास विभाग करता है।
पायल की आवाज पर छात्राओं ने किया क्या दावा?
छात्रावास से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कुछ छात्राओं ने पायल की आवाज सुनने का दावा भी किया था। जनजातीय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ने डोमा आवासीय विद्यालय का दौरा किया। उन्होंने कहा, "इन लक्षणों का किसी अलौकिक शक्ति से कोई संबंध नहीं है। यह मानसिक तनाव से जुड़ी हिस्टीरिया जैसी स्थिति हो सकती है।"
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अधिकारियों द्वारा तैयार मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाद में गांव की कुछ महिलाओं में भी ऐसे ही मानसिक लक्षण दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा है कि आश्रम स्कूल की जगह पहले एक महुआ का पेड़ था, जिस पर आत्माएं रहती थीं। स्कूल प्रबंधन ने उस पेड़ को कटवा दिया, जिसके बाद माना गया कि आत्माएं नाराज हो गईं और छात्रों को परेशान कर रही हैं।
मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में क्या आया सामने?
एक अन्य वजह यह बताई जा रही है कि आश्रम स्कूल के पीछे स्थित उनके आराध्य देवता के मंदिर पर स्कूल की नाली का असर पड़ा है या अतिक्रमण हुआ है, जिससे देवता नाराज हो गए। रिपोर्ट में तीसरा कारण यह बताया गया है कि स्कूल के पास खेत में एक आदिवासी युवक की मौत हुई थी और उसकी आत्मा भूत बन गई। रिपोर्ट में इस पूरी स्थिति के लिए अंधविश्वास, डर, मानसिक तनाव और आत्माओं से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं को जिम्मेदार बताया गया है।
अंधविश्वास उन्मूलन के लिए काम करने वाली महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी भी छात्रों से मिले और उनकी काउंसलिंग की। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने लोगों से इस घटना को अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की अपील की। अमरावती के सांसद बलवंत वानखेड़े ने भी छात्रों से अपील की कि वे डरें नहीं और नियमित रूप से कक्षाओं में लौटें। स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय चौधरी ने कहा कि छात्राओं की काउंसलिंग कर उन्हें वापस स्कूल लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "कुछ छात्राएं लौट भी आई हैं।"
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उत्तरी महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र के चिखलदरा तहसील के डोमा गांव स्थित इस आदिवासी आवासीय विद्यालय में 810 छात्र-छात्राएं रहते हैं। यह स्कूल मुंबई से 700 किलोमीटर से अधिक दूर है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही यह अफवाह फैल गई कि छात्राओं पर किसी आत्मा का साया है। इसके बाद कुछ ही दिनों में करीब 600 छात्र कथित तौर पर "भूतिया" छात्रावास छोड़कर चले गए। छात्रावास का संचालन जनजातीय विकास विभाग करता है।
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पायल की आवाज पर छात्राओं ने किया क्या दावा?
छात्रावास से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कुछ छात्राओं ने पायल की आवाज सुनने का दावा भी किया था। जनजातीय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ने डोमा आवासीय विद्यालय का दौरा किया। उन्होंने कहा, "इन लक्षणों का किसी अलौकिक शक्ति से कोई संबंध नहीं है। यह मानसिक तनाव से जुड़ी हिस्टीरिया जैसी स्थिति हो सकती है।"
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अधिकारियों द्वारा तैयार मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाद में गांव की कुछ महिलाओं में भी ऐसे ही मानसिक लक्षण दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा है कि आश्रम स्कूल की जगह पहले एक महुआ का पेड़ था, जिस पर आत्माएं रहती थीं। स्कूल प्रबंधन ने उस पेड़ को कटवा दिया, जिसके बाद माना गया कि आत्माएं नाराज हो गईं और छात्रों को परेशान कर रही हैं।
मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में क्या आया सामने?
एक अन्य वजह यह बताई जा रही है कि आश्रम स्कूल के पीछे स्थित उनके आराध्य देवता के मंदिर पर स्कूल की नाली का असर पड़ा है या अतिक्रमण हुआ है, जिससे देवता नाराज हो गए। रिपोर्ट में तीसरा कारण यह बताया गया है कि स्कूल के पास खेत में एक आदिवासी युवक की मौत हुई थी और उसकी आत्मा भूत बन गई। रिपोर्ट में इस पूरी स्थिति के लिए अंधविश्वास, डर, मानसिक तनाव और आत्माओं से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं को जिम्मेदार बताया गया है।
अंधविश्वास उन्मूलन के लिए काम करने वाली महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी भी छात्रों से मिले और उनकी काउंसलिंग की। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने लोगों से इस घटना को अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की अपील की। अमरावती के सांसद बलवंत वानखेड़े ने भी छात्रों से अपील की कि वे डरें नहीं और नियमित रूप से कक्षाओं में लौटें। स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय चौधरी ने कहा कि छात्राओं की काउंसलिंग कर उन्हें वापस स्कूल लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "कुछ छात्राएं लौट भी आई हैं।"