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Supreme Court: 'जाति जनगणना नीति का मामला', केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 20 May 2026 03:37 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह सरकार की नीति से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने माना कि पिछड़े वर्गों के लिए योजनाएं बनाने के लिए उनकी सही संख्या जानना जरूरी है। 2027 की जनगणना में जाति के आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। पढ़िए रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें जाति जनगणना कराने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह सरकार की नीति से जुड़ा मुद्दा है।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सरकार को पिछड़े वर्गों के लोगों की संख्या पता होनी चाहिए, ताकि उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाई जा सकें।
याचिकाकर्ता की दलीलों से कोर्ट सहमत नहीं
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ याचिकाकर्ता सुधाकर गुमुला की दलीलों से सहमति नहीं हुई। गुमुला ने खुद कोर्ट में पेश होकर कहा था कि सरकार के पास पहले से ही जातियों से जुड़ी काफी जानकारी और आंकड़े मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, ये सभी नीतिगत मामले हैं कि जनगणना जाति आधारित होनी चाहिए या नहीं। इसमें गलत क्या है? सरकार को यह जानना जरूरी है कि पिछड़े वर्ग में कितने लोग हैं और उनके लिए किस तरह की कल्याणकारी योजनाएं बनानी हैं। यह पूरी तरह नीति का विषय है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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अगले साल होगी जनगणना
साल 2027 में होने वाली जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार होगी जातियों की भी विस्तृत गणना की जाएगी। साथ ही, यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सरकार को पिछड़े वर्गों के लोगों की संख्या पता होनी चाहिए, ताकि उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाई जा सकें।
याचिकाकर्ता की दलीलों से कोर्ट सहमत नहीं
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ याचिकाकर्ता सुधाकर गुमुला की दलीलों से सहमति नहीं हुई। गुमुला ने खुद कोर्ट में पेश होकर कहा था कि सरकार के पास पहले से ही जातियों से जुड़ी काफी जानकारी और आंकड़े मौजूद हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, ये सभी नीतिगत मामले हैं कि जनगणना जाति आधारित होनी चाहिए या नहीं। इसमें गलत क्या है? सरकार को यह जानना जरूरी है कि पिछड़े वर्ग में कितने लोग हैं और उनके लिए किस तरह की कल्याणकारी योजनाएं बनानी हैं। यह पूरी तरह नीति का विषय है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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