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SSC Scam: CBI कोर्ट ने पार्थ चटर्जी सहित पूर्व अधिकारियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई, जानें पूरा मामला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 06 Oct 2022 04:30 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को 23 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने जांच के दौरान फ्लैटों से आभूषण और दूसरी संपत्तियों सहित लगभग 50 करोड़ रुपये नकद जब्त किए थे।
कोर्ट का फैसला
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। बुधवार को अलीपुर में सीबीआई की विशेष अदालत ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। इतना ही नहीं, इस मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य अधिकारियों के लिए भी अदालत ने यही आदेश दिया है।
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जानकारी के मुताबिक, अलीपुर में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने जांच एजेंसी की मांग पर स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) भर्ती घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसई) के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के पूर्व सचिव अशोक साहा और एसएससी के पूर्व सलाहकार एसपी सिन्हा की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया है। अदालत के आदेश के बाद इन लोगों को भी 19 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहना होगा। गौरतलब है कि सीबीआई कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद इस घोटाले की जांच कर रही है।
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गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को 23 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने जांच के दौरान फ्लैटों से आभूषण और दूसरी संपत्तियों सहित लगभग 50 करोड़ रुपये नकद जब्त किए थे। ईडी ने मामले में दोनों पर आरोप लगाया है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी ने राज्य प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूल में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के तहत अवैध रूप से शिक्षक पद की नौकरी देने भ्रष्टाचार करके अवैध रूप से धन कमाया। ईडी ने पीएमएलए अदालत के में दाखिल किए गए आरोपपत्र में यह भी कहा था कि जांच में नकदी सहित कुल बरामदगी की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है।
बाद में सीबीआई ने इस मामले में पूछताछ के लिए 16 सितंबर को पार्थ चटर्जी को अपनी हिरासत में लिया था। इसके बाद 21 सितंबर से उन्हें सीबीआई की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था