गुजरात दंगा मामला: 95 गवाहों, वकील और रिटायर्ड जज का हटाया गया सुरक्षा कवर, बोले- डर के साये में जी रहे हम लोग
Gujarat Riot Cases: गुजरात दंगों के मामलों के 95 गवाहों, वकील और एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का सुरक्षा कवर हटा दिया गया है। यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी के गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ की सिफारिशों पर लिया गया है।
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गुजरात सरकार ने 2002 के गोधरा ट्रेन नरसंहार और उसके बाद हुए दंगों के मामलों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) के गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ की सिफारिशों पर 95 गवाहों की सुरक्षा वापस ले ली है। एसआईटी ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और दंगा पीड़ितों की लड़ाई लड़ने वाले एक वकील को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) द्वारा दी गई सुरक्षा वाप भी ले ली है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
नरोदा पाटिया मामले की गवाह की सुरक्षा भी हटी
सहायक पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) एफए शेख ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी के गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ की सिफारिश के आधार पर अहमदाबाद पुलिस ने नरोदा गाम, नरोदा पाटिया और गुलबर्ग सोसायटी जैसे दंगों के विभिन्न मामलों के 95 गवाहों को दी गई पुलिस सुरक्षा वापस ले ली है।' जिन लोगों की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमें फरीदा शेख ( 54 वर्षीय) भी शामिल हैं। उन्होंने नरोदा पाटिया दंगा मामले में अदालत के समक्ष गवाही दी थी।
डर के साये में जी रहे हम लोग- फरीदा शेख
फरीदा शेख ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के मुताबिक हमारे जैसे लोगों को पुलिस सुरक्षा दी गई थी। एक हथियारबंद पुलिसकर्मी सुबह से शाम तक मेरे घर के बाहर पहरा देता था। 26 दिसंबर को मुझे शहर की पुलिस ने सूचित किया कि मेरा सुरक्षा कवर वापस ले लिया गया है। मुझे कोई कारण नहीं बताया गया। उन्होंने कहा, ऐसा कई अन्य गवाहों के साथ भी हुआ है। हम डर के साये में जी रहे हैं, क्योंकि कई आरोपी अब भी बाहर हैं और वे हमें अब भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सुरक्षा वापस लेने की नहीं बताई वजह: वकील एसएम वोरा
गुलबर्ग सोसायटी के पीड़ितों की ओर से अदालत में पेश हुए वकील एसएम वोरा का भी हाल ही में सुरक्षा कवर वापस ले लिया गया है। वोरा ने कहा, मुझे मुहैया कराए गए सीआईएसएफ के एक जवान ने आना बंद कर दिया और एसआईटी ने सुरक्षा वापस लेने का कोई कारण नहीं बताया है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की भी सुरक्षा खत्म की गई
सूत्रों ने बताया कि नरोदा पाटिया दंगा मामले में 32 लोगों को दोषी ठहराने वाली और 2014 में सेवानिवृत्त होने से पहले नरोदा गाम मामले की अध्यक्षता करने वाली शहर की पूर्व मुख्य सत्र न्यायाधीश ज्योत्सना याग्निक का भी सुरक्षा कवर खत्म हो गया है। उल्लेखनीय है कि सेवा के दौरान करीब 15 धमकियां मिलने के बाद उन्हें सीआईएसएफ सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। सूत्रों ने खुलासा किया कि पिछले महीने दिवाली के बाद उनके आवास के बाहर तैनात सीआईएसएफ गार्डों ने आना बंद कर दिया था।
गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रमुख ने अहमदाबाद पुलिस को लिखा पत्र
एसआईटी के गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रमुख पुलिस अधिकारी बीसी सोलंकी ने 13 दिसंबर को अहमदाबाद पुलिस को पत्र लिखकर आकलन के बाद कुछ गवाहों को दी गई सुरक्षा वापस लेने के एसआईटी के फैसले के बारे में सूचित किया था। सोलंकी ने पत्र में शहर के पुलिस आयुक्त से अनुरोध किया कि वह संबंधित थाना प्रभारी को सुरक्षा कवर हटाए जाने के बाद गवाहों की कुशलता का ध्यान रखने का निर्देश दें।