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सीमांचल: दो दशकों में हुए जमीन सौदों की तैयार हो रही कुंडली, नेपाल-बांग्लादेश सीमा पर कार्रवाई बनेगी नजीर

Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Fri, 29 May 2026 04:38 AM IST
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सार

बिहार के सीमांचल क्षेत्र में सुरक्षा, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार व्यापक जांच की तैयारी में है। सीमांचल के किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया जिलों में जमीन खरीद-बिक्री, विदेश यात्राओं और राजमार्ग किनारे तेजी से बढ़ी आबादी का डाटा जुटाया जा रहा है। इसी तरह की जांच पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में भी शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

Seemanchal list of land deals Data people living highways prepared action on Nepal Bangladesh border precedent
सीमांचल को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

निकट भविष्य में आंतरिक सुरक्षा और घुसपैठ के खिलाफ बिहार के सीमांचल में होने वाली कार्रवाई बड़ी नजीर साबित होगी। दरअसल, केंद्र सरकार के निर्देश पर नेपाल और बांग्लादेश की सीमा के आसपास के सीमांचल के चार जिलों किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया में बीते दो दशकों में जमीन की बड़ी खरीद-फरोख्त, इलाके से जुड़े लोगों की विदेश यात्रा और इस क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर तेजी से हुई बसावट पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में इस क्षेत्र के करीब 7.6 लाख लोग वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाए थे। राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल फरवरी में सीमांचल का तीन दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उनकी इन विषयों पर क्षेत्र के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ मैराथन बैठक हुई थी। सूत्रों का कहना है कि बीते दो दशक में इस क्षेत्र की जनसांख्यिकी में बदलाव और राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर पूर्णिया से चिकन नेक से सटे इलाके तक संदिग्ध लोगों की बसाहट के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे।
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जनसांख्यिकी बदलाव बड़े खतरे का संकेत तो नहीं
सूत्र ने बताया कि चिकन नेक और एनएच 24 पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ने का एक मात्र रास्ता है। यह मामला तब चर्चा में आया जब दिल्ली सांप्रदायिक दंगे के बाद उमर खालिद का विवादास्पद वीडियो वायरल हुआ था। इसमें उमर ने इस हिस्से को अवरुद्ध करने का आह्वान किया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस क्षेत्र को लेकर सरकार बेहद चिंतित थी। यही कारण है कि बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह अचानक इस मोर्चे पर मुखर हुए।

रिपोर्ट तकरीबन तैयार
गृह मंत्रालय की ओर से सीमांचल के चार जिलों से संबंधित रिपोर्ट तैयार है। इसमें पूर्व निर्देश के अनुरूप बीते दो दशकों में बड़े स्तर पर हुई जमीन की खरीद फरोख्त, इसके लिए चुकाई गई रकम का जरिया, बार-बार खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले लोगों और राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे लोगों का डाटा तैयार किया गया है। रिपोर्ट में खासतौर से इस बात का भी जिक्र है कि राजमार्ग के किनारे की बसाहट कितनी पुरानी है।

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बड़ी कार्रवाई की तैयारी
केंद्र पहले ही जनसांख्यिकी बदलाव के संदर्भ में उच्च स्तरीय समिति गठित कर चुकी है। सूत्रों का कहना है कि इसके इतर सरकार की योजना सीमांचल की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी सीमावर्ती और जनसांख्यिकी बदलाव के शिकार जिलों की भी ऐसी ही छानबीन कराने की है। इसकी अगली कड़ी में ऐसे चिन्हित लोगों से पूछताछ होगी जिन्होंने बड़े स्तर पर जमीन खरीद फरोख्त की है या अप्रत्याशित रूप से खाड़ी देशों का बार-बार दौरा किया है।
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