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Operation Lotus: शिवसेना ने 'ऑपरेशन लोटस' की तुलना 'अलकायदा' से की, भाजपा पर 'कमल' को बदनाम करने का आरोप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 26 Aug 2022 09:46 AM IST
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सार

कभी भाजपा की करीबी दोस्त रही शिवसेना ने सामना में उसके खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। दिल्ली की आप सरकार को गिराने के लिए शुरू किया गया 'ऑपरेशन लोटस' फेल हो गया और भाजपा की पोल खुल गई है।

Shiv Sena likens Operation Lotus to Al Qaeda, know all about
udhav thakere in mumbra devi temple - फोटो : social media
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विस्तार
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शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। सामना के अग्रलेख में 'ऑपरेशन लोटस' की तुलना वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा से की गई है। इस तरह उसने भाजपा को आतंकवादी संगठन करार दिया है। महाराष्ट्र में सत्ता से बेदखल हुई शिवसेना ने कहा कि भाजपा ने भगवान विष्णु के प्रिय पुष्प 'कमल' को बदनाम कर दहशत पैदा करने वाला बना दिया है।

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कभी भाजपा की करीबी दोस्त रही शिवसेना ने सामना में उसके खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। दिल्ली की आप सरकार को गिराने के लिए शुरू किया गया 'ऑपरेशन लोटस' फेल हो गया और भाजपा की पोल खुल गई है।
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शिवसेना ने हालिया सियासी घटनाक्रमों के माध्यम से भाजपा पर आरोप लगाए हैं। सामना के लेख में शिवसेना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावे का जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था, आप  सरकार गिराने के लिए चलाया गया 'ऑपरेशन लोटस' फेल हो गया है। 

संभ्रमित युग! बदनाम कमल
सामना में 'संभ्रमित युग! बदनाम कमल! शीर्षक से लिखे आलेख में लिखा है कि, 'देश के हालात संभ्रमित होने जैसे होने की बात शरद पवार ने कही है। ऐसी कई संभ्रमित बातों की वर्तमान में बाढ़ आ गई है। सरकारें चुनकर लाने की बजाय विरोधियों की सरकारों को गिराना, पार्टी तोड़ना ऐसा जो चल रहा है, इसकी वजह से विष्णु का पसंदीदा फूल 'कमल' बदनाम हो गया है। 'ऑपरेशन लोटस' अर्थात 'कमल' अलकायदा की तरह दहशतवादी शब्द बन गया है। 

दिल्ली व बिहार में फेल हो गया ऑपरेशन 
'दिल्ली की सरकार को गिराने के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन कमल फेल हो गया है। भाजपा की पोल खुल गई है। ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने की है। बिहार में भी 'ऑपरेशन कमल’ नहीं चला तथा तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.सी. चंद्रशेखर राव ने अमित शाह को खुली चुनौती दी कि ईडी, सीबीआई आदि लगाकर मेरी सरकार गिराकर दिखाओ। महाराष्ट्र में ईडी के डर से शिंदे गुट घुटनों के बल बैठ गया, ऐसे अन्य राज्यों में कोई भी झुकने को तैयार नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम दिल्ली राज्य में घटित हुआ। 

ईडी, सीबीआई के इस्तेमाल से सरकार गिराने का प्रयास
शिवसेना ने लिखा कि ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल करके केजरीवाल की सरकार को गिराने का प्रयास चल रहा है। दिल्ली सरकार की शराब नीति, उनकी आबकारी नीति, उनके द्वारा मद्य विक्रेताओं को दिए गए ठेके, यह भाजपा के दृष्टिकोण से आलोचना का विषय होगा, परंतु यह निर्णय व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि पूरी सरकार का था और इसमें दिल्ली के नायब राज्यपाल का भी समावेश होता है, लेकिन कैबिनेट के निर्णय का ठीकरा उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर फोड़कर उनके खिलाफ सीबीआई ने छापेमारी की। उन्हें इस प्रकरण में एक नंबर का आरोपी बनाया और यह प्रकरण अब ईडी के पास मतलब भाजपा की विशेष शाखा के सुपुर्द कर दिया गया है।

मनीष सिसोदिया ने भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' पर बम गिराया
शिवसेना ने लिखा कि मनीष सिसोदिया पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। सिसोदिया कोई भागनेवाले गृहस्थ नहीं हैं। लेकिन किसी अपराधी की तरह उनके खिलाफ 'लुकआउट' नोटिस जारी करके जनता द्वारा चुनी गई सरकार की तौहीन की गई। इसलिए ही देश की स्थिति संभ्रम वाली है। ऐसा पवार कहते हैं तो यह सत्य है। यह सब केजरीवाल की सरकार को गिराने के लिए किया जा रहा है। अब मनीष सिसोदिया ने भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' पर बम गिराया है। 

भाजपा को 2024 का डर
'सामना' में शिवसेना ने भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा, 'केंद्र  सरकार और उनके प्रमुखों को 2024 को लेकर डर लग रहा है। यह डर केजरीवाल, ममता, उद्धव ठाकरे, नीतीश कुमार और शरद पवार का है। इन प्रमुखों को अपने साये से भी डर लगता है। इसलिए नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के भी पीछे पड़ गए, ऐसा लगता है। इतना बड़ा बहुमत होने के बावजूद इन लोगों को डर क्यों लगता है? इसका एक ही उत्तर है उनका बहुमत पवित्र नहीं है। वह चुराया गया है।
'सामना' में शिवसेना ने भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा, 'केंद्र  सरकार और उनके प्रमुखों को 2024 को लेकर डर लग रहा है। यह डर केजरीवाल, ममता, उद्धव ठाकरे, नीतीश कुमार और शरद पवार का है। इन प्रमुखों को अपने साये से भी डर लगता है। इसलिए नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के भी पीछे पड़ गए, ऐसा लगता है। इतना बड़ा बहुमत होने के बावजूद इन लोगों को डर क्यों लगता है? इसका एक ही उत्तर है उनका बहुमत पवित्र नहीं है। वह चुराया गया है।

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