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अशोक खरात विवाद: शिवसेना UBT का सरकार पर हमला, कहा- अंधविश्वास की भेंट चढ़ रही महाराष्ट्र की प्रगतिशील विरासत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 23 Mar 2026 12:49 PM IST
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सार

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' के जरिए महाराष्ट्र सरकार पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पार्टी ने ज्योतिषी अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद मंत्रियों के उसके साथ संबंधों पर सवाल उठाए हैं। लेख में कहा गया कि तंत्र-मंत्र की राजनीति राज्य के प्रगतिशील विचारों को खत्म कर रही है।

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उद्धव ठाकरे, प्रमुख, शिवसेना (यूबीटी) - फोटो : ANI
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विस्तार

शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर कड़ा प्रहार किया है। मामले में खुद को 'शाही ज्योतिषी' बताने वाले अशोक खरात के विवाद ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पार्टी ने कहा, खरात को महिलाओं के शोषण और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले ने उन बड़े मंत्रियों और अधिकारियों को बेनकाब कर दिया है, जो राजनीतिक लाभ के लिए इस बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते थे।
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मामले को लेकर पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में कहा गया, महाराष्ट्र की राजनीति अब प्रगतिशील विचारों को छोड़कर अंधविश्वास के जंगल में दबती जा रही है। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता का यह सफर गुवाहाटी के तटों से शुरू होकर खरात बाबा के आश्रम की चौखट तक जा रही है। यह बदलाव राज्य की जड़ों के लिए बहुत खतरनाक है।
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संपादकीय में दावा किया गया है कि खरात ने धर्म और भविष्य बताने के नाम पर कई महिलाओं का शोषण किया। इन गंभीर आरोपों के बाद भी कथित तौर पर राज्य कैबिनेट के कई सदस्य उसके पक्के भक्त बने रहे। शिवसेना ने कहा कि सिर्फ खरात ही अपराधी नहीं है, बल्कि वे नेता भी बराबर के दोषी हैं जो उसके पैरों में गिरते थे और उससे सलाह लेते थे।

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लेख में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि कैबिनेट मंत्रियों ने कथित तौर पर अपने राजनीतिक विरोधियों को हराने के लिए 'अघोरी' (तंत्र-मंत्र) अनुष्ठान किए। शिवसेना का कहना है कि अगर खरात पर समय रहते कार्रवाई होती, तो कई पीड़ित महिलाओं को बचाया जा सकता था।

सामना ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की कड़ी आलोचना की है। लेख के अनुसार, उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के पैर धोए जिसने महिलाओं का शोषण किया। उनका इस्तीफा इस गहरे सिस्टम की गड़बड़ी को दबाने की एक कोशिश मात्र बताया गया। संपादकीय में आसाराम बापू और राम रहीम जैसे लोगों का उदाहरण देते हुए सवाल पूछा गया कि सत्ताधारी दल ऐसे लोगों का समर्थन क्यों करता है।

लेख में महाराष्ट्र के महान समाज सुधारकों जैसे महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉ. बी.आर. अंबेडकर और कवयित्री बहिणाबाई चौधरी के विचारों को याद किया गया। संपादकीय में कहा गया, बहिणाबाई ने हाथ की लकीरों के बजाय कड़ी मेहनत और आत्मनिर्भरता को महत्व दिया था। इसके उलट, आज के मंत्री ताबीज और धागों में जकड़े हुए हैं। वे अपनी योग्यता के बजाय तंत्र-मंत्र से सफलता पाना चाहते हैं।

मामले को लेकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने टिप्पणी की कि 'मिर्ची यज्ञ' के धुएं ने आखिरकार मुख्यमंत्री फडणवीस की आंखें खोल दीं और कार्रवाई हुई। लेकिन इससे महाराष्ट्र की प्रगतिशील छवि को गहरा धक्का लगा है। पार्टी ने कहा जब सत्ता मेहनत के बजाय पैसे और साजिश से हासिल की जाती है, तो ऐसे ही अंधविश्वास पैदा होते हैं। जो लोग अपना आत्मविश्वास खो देते हैं, वही इन कर्मकांडों के पीछे भागते हैं।

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