Maharashtra: 'जलेबी पर सख्ती तो बर्गर पर क्यों नहीं?' मिलिंद देवड़ा बोले– सभी जंक फूड पर हो बराबर कार्रवाई
शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने देश में बढ़ते मोटापे को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार समोसे-जलेबी जैसे भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों पर सख्ती कर रही है, तो विदेशी फास्ट फूड जैसे बर्गर, पिज्जा और डोनट्स पर भी उतने ही सख्त नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने पैकेज्ड जूस को चीनी वाले ड्रिंक बताते हुए कोका-कोला से भी ज्यादा हानिकारक बताया।
विस्तार
शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने देश में बढ़ती मोटापे की समस्या को लेकर सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार जलेबी और समोसे जैसे भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों पर नियम बना रही है, तो विदेशी फास्ट फूड जैसे बर्गर, पिज्जा और डोनट्स पर भी वैसी ही सख्ती होनी चाहिए। शिंदे गुट के नेता ने कहा कि अगर सरकार सड़क किनारे समोसा बेचने वाले छोटे विक्रेताओं पर नियम लागू करती है, तो मैकडोनाल्ड जैसी बड़ी विदेशी कंपनियों को भी उन्हीं नियमों के दायरे में लाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी तरह के अनहेल्दी (अस्वास्थ्यकर) खाने पर एक जैसा नियंत्रण होना चाहिए, चाहे वो देसी हो या विदेशी।
पैकेज्ड जूस को लेकर भी बोले सांसद
राज्यसभा सांसद ने आगे बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड और पैकेज्ड जूस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जूस असल में फलों के जूस नहीं होते, बल्कि ये सिर्फ चीनी वाले ड्रिंक होते हैं। देवड़ा ने कहा कि इनका कोका-कोला से कोई फर्क नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि कुछ रिसर्च तो ये तक कहते हैं कि कोका-कोला इन प्रोसेस्ड और पैकेज्ड जूस से ज्यादा बेहतर है।
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प्रधानमंत्री मोदी को किया धन्यवाद
इसके साथ ही मिलिंद देवड़ा ने मोटापे के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि मोटापा भारत में सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक समस्या भी बनता जा रहा है। देवड़ा ने बताया कि इस मुद्दे पर संसद की अधीनस्थ विधायी समिति काम कर रही है और स्वास्थ्य मंत्रालय व खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (एपएसएसआईए) से भी बातचीत जारी है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी।
'फास्ट फूड कल्चर' से बढ़ रहा मोटापा
देवड़ा ने कहा कि पश्चिमी देशों का फास्ट फूड कल्चर भारत में तेजी से फैल रहा है। भले ही यह संस्कृति गलत नहीं है, लेकिन इसका नकारात्मक असर जरूर दिख रहा है, और वह है मोटापा। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से कुछ अहम मांग की कि, जिसमें देसी और विदेशी जंक फूड पर बराबर नियंत्रण, सिर्फ छोटे दुकानदारों पर नहीं, बड़ी कंपनियों पर भी सख्ती, पैकेज्ड जूस को लेकर भी उपभोक्ताओं को सच बताया जाए, मोटापे को रोकने के लिए देशव्यापी नियम और जागरूकता अभियान जैसी मांहे शामिल है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुरू हुई पहल
गौरतलब है कि ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दावा किया गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स नागपुर सहित देशभर के सभी केंद्रीय संस्थानों को सलाह दी कि वे ऑयल और शुगर बोर्ड लगाएं, जिन पर आपके नाश्ते में मौजूद फैट और शुगर की मात्रा साफ-साफ लिखी हो। सरकार की ओर से उठाया जाने वाला ये कदम खास तौर पर जंक और फास्ट फूड्स से होने वाले सेहत को नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने और इनसे दूरी बनाने की दिशा में ये बड़ा कदम माना जा रहा है।