पीएम केयर्स फंड में करोड़ों, फिर भी स्कूल बदहाल?: दीपके का सवाल; बोले- इतनी रकम से बन जाएं 1000 हाईटेक स्कूल
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल ग्रामीण स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने के लिए करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फंड में 8,452 करोड़ रुपये मौजूद हैं, जबकि कई ग्रामीण स्कूलों में सड़क, बेंच और पीने के पानी जैसी सुविधाओं की कमी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड के इस्तेमाल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। उन्होंने कहा कि इस फंड का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।
दीपके की पार्टी ने ग्रामीण स्कूलों की खराब स्थिति को सामने लाने के लिए 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया है। उनका दावा है कि देश के ग्रामीण इलाकों में बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क, स्कूलों में बैठने के लिए बेंच और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है।
पीएम केयर्स फंड में कितनी राशि मौजूद है?
पीएम केयर्स फंड की ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक फंड में कुल 8,452 करोड़ रुपये का बैलेंस था। एक साल पहले यह राशि 7,173 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 के दौरान फंड से कुल 87.85 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 15.6 करोड़ रुपये थी। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पीएम केयर्स फंड में मौजूद 8,452 करोड़ रुपये में से करीब 7,846 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में और 605 करोड़ रुपये सेविंग बैंक खातों में रखे गए थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत 2024-25 में 87.8 लाख रुपये खर्च किए गए। यह योजना कोरोना महामारी के दौरान अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावक को खोने वाले बच्चों की सहायता के लिए शुरू की गई थी। पिछले वित्त वर्ष में इस योजना के तहत 15.37 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
क्या 8,500 करोड़ रुपये से बन सकते हैं 1,000 से ज्यादा हाईटेक स्कूल?
अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर एक आधुनिक और सभी सुविधाओं से लैस स्कूल बनाने में करीब 8 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, तो 8,500 करोड़ रुपये की राशि से 1,000 से ज्यादा हाईटेक मॉडल स्कूल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बताई जाती है, तो इस राशि का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा और स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है।
महाराष्ट्र के ग्रामीण स्कूलों को लेकर क्या बोले अभिजीत दीपके?
दीपके ने महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में हाल में किए गए अपने स्कूल दौरों का जिक्र करते हुए वहां की स्थिति को "बहुत खराब" बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से जब स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं होने की वजह पूछी गई तो उन्हें फंड की कमी का हवाला दिया गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ स्कूलों में पैसे की कमी बताई जा रही है और दूसरी तरफ पीएम केयर्स फंड में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि क्या इस राशि का इस्तेमाल स्कूलों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
पीएम मोदी से क्या अपील की गई?
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल लोगों, शिक्षा और गरीब बच्चों के स्कूलों के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को यह दिखाना चाहिए कि उन्हें वास्तव में बच्चों और उनकी शिक्षा की चिंता है। दीपके ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में एक गंदे शौचालय और जर्जर स्कूल भवन की तस्वीरें भी साझा कीं और कहा कि पीएम केयर्स फंड का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।