चीन ने अरुणाचल में 60 किमी तक कब्जा किया?: रिजिजू ने बताई हकीकत, बोले- झूठी तस्वीरों से सेना का मनोबल न गिराएं
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन के अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने के दावे को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद और स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन गलत तस्वीरों और सूचनाओं के जरिए चीन की घुसपैठ का दावा करना सही नहीं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से चीन की कथित घुसपैठ को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। समाचार एजेंसी से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा से जुड़ी चिंताओं को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि भारत-चीन सीमा का कई हिस्सों में अब तक औपचारिक सीमांकन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थानीय लोगों की चिंता वास्तविक है, लेकिन बिना जमीनी स्थिति समझे अपुष्ट वीडियो और दावों के जरिए भ्रम फैलाना उचित नहीं है।
अरुणाचल में सीमा विवाद की असली वजह क्या है?
रिजिजू के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा काफी लंबी है, लेकिन कई जगहों पर न तो सीमा स्तंभ हैं और न ही जमीन पर स्पष्ट सीमा रेखा निर्धारित है। उन्होंने कहा कि यह समस्या नई नहीं है और लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने बताया कि सीमांकन नहीं होने के कारण कुछ इलाकों को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर है। इसी वजह से सीमा से लगे गांवों के लोगों में भी चिंता बनी रहती है।
क्या सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार?
रिजिजू ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित करने को लेकर अलग नीति अपनाई गई थी। उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी के संसद में दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारतीय सीमा की तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाने की नीति थी। रिजिजू ने कहा कि दूसरी ओर चीन ने सीमा के पास सड़क और अन्य ढांचागत सुविधाओं का निर्माण लगातार जारी रखा।
2014 के बाद सीमा पर क्या बदला?
रिजिजू ने दावा किया कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने सीमा क्षेत्रों में सड़क और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि अब भारतीय सीमा की तरफ भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों तक सड़कें बनाई जा रही हैं। उन्होंने अपने माजा गांव के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि यह आखिरी सीमा बिंदुओं में से एक है और वहां सड़क निर्माण का काम पूरा किया गया है। रिजिजू के मुताबिक, आजादी के बाद लंबे समय तक वहां सड़क नहीं थी।
तवांग-ताकसिंग क्षेत्र में सड़क को लेकर क्या बोले रिजिजू?
रिजिजू ने ताकसिंग की सड़क कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2019 में वहां सड़क पहुंचाई गई। उनके मुताबिक, पहले भारत की तरफ सड़क नहीं थी, जबकि चीन ने अपने क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर लिया था। उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में चीन ने अपनी मौजूदगी और सीमा से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया, जिसके जवाब में भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करनी शुरू की।
क्या चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा किया है?
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ विवादित हिस्सों में सीमा का स्पष्ट सीमांकन नहीं होने के कारण दोनों पक्ष अपने-अपने क्षेत्र का दावा करते हैं। उनके अनुसार, भारत की ओर के लोगों का मानना है कि भारतीय क्षेत्र आगे तक फैला है, जबकि दूसरी तरफ के स्थानीय लोग भी उस जमीन पर अपना दावा करते हैं। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति जटिल बनी हुई है।
रिजिजू ने लोंगजू से आगे घाटी में स्थित एक इलाके का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां चीनी पीएलए ने गांव जैसे दिखने वाले कुछ ढांचे और इमारतें बनाई हैं। उनके मुताबिक, उस क्षेत्र पर 1959 में चीन ने कब्जा किया था और 1962 में वहां अपनी स्थिति को और मजबूत किया। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सीमा बिंदु पर भारतीय पोस्ट मौजूद है।
क्या सीमा पर चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं?
रिजिजू ने माना कि ऊंची पहाड़ी चोटियों वाले क्षेत्रों में चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात भारतीय सेना और आईटीबीपी की पेट्रोलिंग को पहले की तुलना में मजबूत किया गया है। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की बात कही, लेकिन साथ ही गलत या फर्जी सामग्री के जरिए देश में भ्रम पैदा करने से बचने की अपील की।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर सीमा मुद्दे को लेकर भ्रामक सामग्री के जरिए राजनीतिक नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का कथित फर्जी वीडियो भारत-चीन सीमा से जोड़कर प्रसारित करना गलत है। रिजिजू के मुताबिक, इस तरह की गलत जानकारी से आम लोगों में भ्रम पैदा होता है और सीमा पर तैनात सशस्त्र बलों का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है।
क्या सीमा पर सेना और ITBP की गश्त बढ़ी?
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, पहले की तुलना में भारतीय सेना और ITBP ने सीमा क्षेत्र में अपनी पेट्रोलिंग काफी मजबूत की है। उन्होंने कहा कि सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारत पूरी तरह सतर्क है। रिजिजू ने लोंगजू से आगे एक स्थान का भी जिक्र किया, जहां घाटी और नदी का संगम है। उनके मुताबिक, वहां चीनी PLA ने कुछ ढांचे और गांव जैसे भवन बनाए हैं।