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Supreme Court: 'सोनम वांगचुक पूरी तरह से ठीक, सर्वोत्तम उपचार मिल रहा', केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 09 Feb 2026 04:58 PM IST
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सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि सोनम वांगचुक की सेहत ठीक है और उन्हें एम्स, जोधपुर में बेहतर इलाज मिल रहा है। कोर्ट ने तय किया कि उनकी एनएसए के तहत हिरासत पर बुधवार को सुनवाई होगी और कोई और स्टे नहीं मिलेगा। पढ़ें रिपोर्ट-

Sonam Wangchuk 'perfectly good', getting best of treatment: Centre to SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार


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केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक की सेहत पूरी तरह ठीक है। उन्हें जोधपुर स्थित एम्स में बेहतर उपचार मिल रहा है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने बताया कि वांगचुक की हिरासत की समीक्षा के मामले में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति कुमार ने पूछा, क्या वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनकी हिरासत पर कोई कदम उठाया गया। उन्होंने कहा, क्या हुआ? कोई प्रगति हुई? यह काम हुआ? इस पर नटराज ने जवाब दिया, अभी तक कुछ नहीं हुआ। उन्हें सबसे अच्छा इलाज मिल रहा है। 
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वहीं, वांगचुक के वकील ने कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं है। अब समय आ गया है कि हिरासत पर पुनर्विचार किया जाए। न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी यही सुझाव दिया गया था। उन्होंने कहा कि वांगचुक स्वयं स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं और डॉक्टर ने भी पुष्टि की है।

वांगचुक के स्वास्थ्य पर केंद्र ने क्या बताया?
एएसजी नटराज ने कहा, जहां तक स्वास्थ्य का सवाल है, वह पूरी तरह ठीक हैं। जोधपुर में लद्दाख से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। राजस्थान में एम्स है, लद्दाख में कुछ नहीं है। न्यायमूर्ति वराले ने तुरंत कहा, नहीं, आप ऐसा नहीं कह सकते। नटराज ने कहा कि मामले को कल के बाद लिया जाए। पीठ ने कहा, यह बंदी प्रत्यक्षीकरण ( हैबियस कॉर्पस) याचिका है। आप यह नहीं कह सकते। पिछले शुक्रवार को भी हम इसे नहीं ले सके थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि बुधवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर सुनवाई की जाएगी। याचिका में वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत को गैरकानूनी बताया गया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि और देरी नहीं की जाएगी। 
 
पहले, वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने कहा कि वांगचुक को विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराई जानी चाहिए। वांगचुक अक्सर पेट दर्द की शिकायत कर रहे थे, शायद गंदे पानी के कारण। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जोधपुर स्थित एम्स के डॉक्टरों ने वांगचुक की जांच की और रिपोर्ट कोर्ट को दी।

केंद्र सरकार ने पिछली सुनवाई पर कोर्ट में क्या कहा था?
  • चार फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी हिरासत पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
  • कोर्ट ने कहा था कि वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट अच्छी नहीं है। एएसजी नटराज ने कहा था कि वह संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेंगे।
  • पिछले हफ्ते केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने कहा था कि वांगचुक को सीमा क्षेत्र में लोगों को भड़काने के आरोप में हिरासत में रखा गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक की एनएसए के तहत हिरासत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करके हुई। केंद्र ने पहले कहा था कि वांगचुक ने युवाओं को नेपाल और बांग्लादेश जैसे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भड़काया।

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का डॉक्टर की जमानत रद्द करने से इनकार, इलाज के दौरान दो मरीजों की हुई थी मौत

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम क्या है?
एनएसए सरकार को अनुमति देता है कि ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लिया जाए जो भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का काम कर सकते हैं।  हिरासत की अधिकतम अवधि 12 महीने है, इसे पहले भी समाप्त किया जा सकता है। 29 जनवरी को वांगचुक ने आरोपों से इनकार किया कि उन्होंने किसी तरह सरकार को गिराने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आलोचना और विरोध करना उनका अधिकार है।

कब हिरासत में लिए गए थे सोनम वांगचुक?
वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह लेह में हिंसा के दो दिन बाद हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। याचिका में कहा गया कि यह पूरी तरह असंगत है कि वांगचुक को अचानक निशाना बनाया गया। उन्होंने लद्दाख और भारत में शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में तीन दशकों से योगदान दिया है।

आंगमो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की और कहा कि हिंसा से लद्दाख की मेहनत और शांति नष्ट होगी। उनके लिए यह जीवन का सबसे दुखद दिन था।




 
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