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BBC Row: जेएनयू के बाद हैदराबाद यूनिवर्सिटी में हुई डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग, ABVP ने चलाई कश्मीर फाइल्स
Fri, 27 Jan 2023 03:28 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
पीटीआई, तेलंगाना
पीटीआई, तेलंगाना
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 27 Jan 2023 03:28 AM IST
सार
केंद्र सरकार द्वारा डॉक्यूमेंट्री इंडिया: द मोदी क्वेश्चन को दिखाए जाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी थी। गणतंत्र दिवस पर विश्वविद्यालय परिसर में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने पीएम पर बनी विवादित डाक्यूमेंट्री दिखाई।
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हैदराबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
साल 2002 के गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी डाक्यूमेंट्री 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' पर विवाद थम नहीं रहा है। जेएनयू के बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय परिसर में बीबीसी की विवादित डाक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई। वहीं, इसके जवाब में एबीवीपी ने यूनिवर्सिटी कैंपस में कश्मीरी पंडितों पर बनी 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म दिखाई। विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित बॉलीवुड फिल्म द कश्मीर फाइल्स कश्मीरियों की हत्याओं और पंडितों के पलायन को दिखाती है।
बता दें कि, केंद्र सरकार द्वारा डॉक्यूमेंट्री इंडिया: द मोदी क्वेश्चन को दिखाए जाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई थी। गणतंत्र दिवस पर विश्वविद्यालय परिसर में वामपंथी दल स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) ने पीएम पर बनी विवादित डाक्यूमेंट्री दिखाई। इस अवसर पर हैदराबाद विश्वविद्यालय के 400 से अधिक छात्र मौजूद रहे। सोशल मीडिया पर एसएफआई ने एक पोस्ट करते हुए छात्रों की एकता पर बधाई दी और एबीवीपी के हंगामा करने की कोशिशों को नाकाम करार दिया। जिसके बाद एबीवीपी ने भी 'द कश्मीर फाइल्स' की स्क्रीनिंग की।
जेएनयू में की गई स्क्रीनिंग पर हुआ था बवाल
विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रींनिंग दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी की गई थी। जेएनयू में तो इसको लेकर बवाल भी हुआ। वहां विश्वविद्यालय प्रशासन के विरोध के बावजूद इसकी स्क्रीनिंग की गई थी।
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डॉक्यूमेंट्री में क्या है, जिस पर विवाद हो रहा है?
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी ने India: The Modi Question शीर्षक से दो पार्ट में एक नई सीरीज बनाई है। इसका पहला पार्ट मगंलवार को जारी किया गया है। इस सीरीज में पीएम मोदी के शुरुआती दौर के राजनीतिक सफर पर बातें की गईं हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके जुड़ाव, भाजपा में बढ़ते कद और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति की चर्चा भी इसमें की गई है। मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात में हुए दंगों का भी इसमें जिक्र है। इस हिस्से में गुजरात दंगों में पीएम मोदी की कथित भूमिका की बात कही गई है। इसी को लेकर विवाद हो रहा है।
विवाद कहां से शुरू हुआ?
17 जनवरी को इसे बीबीसी टू पर रिलीज किया गया था। सीरीज के आते ही विवाद शुरू हो गया। ब्रिटेन में सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू हुआ। इसको लेकर लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि बीबीसी को 1943 के बंगाल अकाल पर भी सीरीज बनानी चाहिए। जिसमें 30 लाख से ज्यादा लोगों की भुखमरी और बीमारी के कारण मौत हो गई थी। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि बीबीसी को यूकेः द चर्चिल क्वेश्चन शीर्षक से भी सीरीज बनानी चाहिए। विवाद बढ़ता देख एक दिन बाद ही बुधवार को बीबीसी ने सीरीज को यूट्यूब से हटा दिया।
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बता दें कि, केंद्र सरकार द्वारा डॉक्यूमेंट्री इंडिया: द मोदी क्वेश्चन को दिखाए जाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई थी। गणतंत्र दिवस पर विश्वविद्यालय परिसर में वामपंथी दल स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) ने पीएम पर बनी विवादित डाक्यूमेंट्री दिखाई। इस अवसर पर हैदराबाद विश्वविद्यालय के 400 से अधिक छात्र मौजूद रहे। सोशल मीडिया पर एसएफआई ने एक पोस्ट करते हुए छात्रों की एकता पर बधाई दी और एबीवीपी के हंगामा करने की कोशिशों को नाकाम करार दिया। जिसके बाद एबीवीपी ने भी 'द कश्मीर फाइल्स' की स्क्रीनिंग की।
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जेएनयू में की गई स्क्रीनिंग पर हुआ था बवाल
विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रींनिंग दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी की गई थी। जेएनयू में तो इसको लेकर बवाल भी हुआ। वहां विश्वविद्यालय प्रशासन के विरोध के बावजूद इसकी स्क्रीनिंग की गई थी।
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डॉक्यूमेंट्री में क्या है, जिस पर विवाद हो रहा है?
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी ने India: The Modi Question शीर्षक से दो पार्ट में एक नई सीरीज बनाई है। इसका पहला पार्ट मगंलवार को जारी किया गया है। इस सीरीज में पीएम मोदी के शुरुआती दौर के राजनीतिक सफर पर बातें की गईं हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके जुड़ाव, भाजपा में बढ़ते कद और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति की चर्चा भी इसमें की गई है। मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात में हुए दंगों का भी इसमें जिक्र है। इस हिस्से में गुजरात दंगों में पीएम मोदी की कथित भूमिका की बात कही गई है। इसी को लेकर विवाद हो रहा है।
विवाद कहां से शुरू हुआ?
17 जनवरी को इसे बीबीसी टू पर रिलीज किया गया था। सीरीज के आते ही विवाद शुरू हो गया। ब्रिटेन में सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू हुआ। इसको लेकर लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि बीबीसी को 1943 के बंगाल अकाल पर भी सीरीज बनानी चाहिए। जिसमें 30 लाख से ज्यादा लोगों की भुखमरी और बीमारी के कारण मौत हो गई थी। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि बीबीसी को यूकेः द चर्चिल क्वेश्चन शीर्षक से भी सीरीज बनानी चाहिए। विवाद बढ़ता देख एक दिन बाद ही बुधवार को बीबीसी ने सीरीज को यूट्यूब से हटा दिया।