सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court cancels remand of Telangana woman in drug offense case News In Hindi

Supreme Court: 'भविष्य की आशंका अपराध का आधार नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की महिला की रिमांड रद्द की

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 11 Jan 2026 06:53 PM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल डर कि जमानत मिलने पर महिला फिर अपराध करेगी, रोकने का पर्याप्त कारण नहीं। आदेश में सार्वजनिक व्यवस्था पर असर स्पष्ट नहीं था। कोर्ट ने महिला की रिहाई का आदेश दिया और हाईकोर्ट का अक्टूबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया।

Supreme Court cancels remand of Telangana woman in drug offense case News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की एक महिला के प्रिवेंटिव डिटेंशन (रोकने के आदेश) आदेश को रद्द कर दिया है। महिला को 1986 के तेलंगाना कानून में खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम के तहत ड्रग अपराध में आरोपी बताया गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल यह डर कि जमानत मिलने पर वह फिर से अपराध करेगी, किसी को रोकने का पर्याप्त कारण नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी कहा कि डिटेंशन आदेश में यह स्पष्ट नहीं था कि महिला के अपराध से सार्वजनिक व्यवस्था पर कैसे असर पड़ेगा और जमानत की शर्तों या पिछले मुकदमों पर ध्यान नहीं दिया गया।

Trending Videos


बता दें कि महिला को मार्च 2025 में रोका गया था क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर का मानना था कि उसके खिलाफ चल रहे मामूली मुकदमे उसका व्यवहार नहीं बदल पाएंगे और जमानत मिलने पर वह फिर से अपराध करेगी। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि जमानत की शर्तें और पिछले मामलों की जानकारी पर विचार नहीं किया गया और महिला को रोकने के लिए कोई ठोस आधार नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- केरल में अमित शाह ने फूंका चुनावी बिगुल: विजयन सरकार पर साधा निशाना, बोले- राज्य में भाजपा की बढ़ रही पकड़

सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेके महेश्वरी और एएस चंद्रुकर की बेंच ने कहा कि केवल आशंका या अनुमान कि कोई व्यक्ति भविष्य में अपराध करेगा, उसे रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि डिटेंशन ऑर्डर में यह स्पष्ट नहीं था कि महिला के अपराध से जनता की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था पर कैसे असर पड़ेगा।

कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ तीन मामूले दर्ज होने से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होती, जब तक यह साबित न हो कि नशे का सामान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ऐसे में अगर महिला ने जमानत की शर्तें तोड़ी होतीं, तो उसकी जमानत रद्द करने का कानूनी रास्ता था, उसे रोकने के लिए ऐसा नहीं किया गया।

ये भी पढ़ें:- बड़ी कार्रवाई की तैयारी: अल-फलाह यूनिवर्सिटी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत हो सकती है अटैच, काली कमाई से बना कैंपस!

इस दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था में अंतर है और डिटेंशन आदेश में इसे ध्यान में नहीं रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने महिला की तत्काल रिहाई का आदेश दिया, तेलंगाना हाईकोर्ट के 28 अक्टूबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि भविष्य में केवल अनुमान या आशंका पर किसी को रोकना उचित नहीं होगा।

अन्य वीडियो

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed