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नोएडा श्रमिक आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को आदेश, आरोपियों को निजी तौर पर पेश करें; टॉर्चर के लगे आरोप
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 15 May 2026 05:32 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा श्रमिक आंदोलन के आरोपियों के साथ हिरासत में हुई कथित हिंसा को गंभीरता से लेते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश करने को कहा है। एक तरफ जहां पुलिस विदेशी फंडिंग और एनएसए की दलील दे रही है, वहीं दूसरी तरफ मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोपी दो व्यक्तियों को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वे आरोपी आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को 18 मई की दोपहर दो बजे पेश करें।
यह आदेश आरोपी आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद की ओर से दायर याचिका पर आया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदित्य को गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में प्रताड़ित (कस्टोडियल टॉर्चर) किया गया है। आदित्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने तर्क दिया कि वह एक फैक्ट्री में इंजीनियर हैं और बच्चों के लिए लाइब्रेरी चलाते हैं। उन्होंने कहा कि आदित्य के भाषण केवल श्रमिकों के अधिकारों पर केंद्रित थे और इसके रिकॉर्डेड सबूत मौजूद हैं।
आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गिरफ्तारी में पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई है। इसी मामले में गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने बड़ा दावा करते हुए पत्रकार सत्यम वर्मा और छात्रा कार्यकर्ता आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया है। पुलिस का आरोप है कि सत्यम वर्मा के निजी बैंक खाते में विदेशों से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि डॉलर, पाउंड और यूरो के रूप में आई है।
45 हजार श्रमिकों का था प्रदर्शन
पुलिस जांच के अनुसार, 13 अप्रैल को नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में करीब 80 स्थानों पर 40,000 से 45,000 श्रमिक इकट्ठा हुए थे, जिससे शहर की व्यवस्था ठप हो गई थी। पुलिस सत्यम वर्मा और आकृति को इस आगजनी और अशांति का मुख्य सूत्रधार मान रही है। सत्यम को 19 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि सत्यम ने विदेशी फंड को अपने अन्य निजी खातों में ट्रांसफर किया। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले के मानवाधिकार और कानूनी पहलुओं पर सुनवाई करेगा।
यह भी पढ़ें: Noida Protest: श्रमिक हिंसा में हुई थी विदेशी फंडिंग, सत्यम के खाते में कई देशों से जमा कराए गए एक करोड़ रुपये
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यह आदेश आरोपी आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद की ओर से दायर याचिका पर आया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदित्य को गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में प्रताड़ित (कस्टोडियल टॉर्चर) किया गया है। आदित्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने तर्क दिया कि वह एक फैक्ट्री में इंजीनियर हैं और बच्चों के लिए लाइब्रेरी चलाते हैं। उन्होंने कहा कि आदित्य के भाषण केवल श्रमिकों के अधिकारों पर केंद्रित थे और इसके रिकॉर्डेड सबूत मौजूद हैं।
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आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गिरफ्तारी में पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई है। इसी मामले में गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने बड़ा दावा करते हुए पत्रकार सत्यम वर्मा और छात्रा कार्यकर्ता आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया है। पुलिस का आरोप है कि सत्यम वर्मा के निजी बैंक खाते में विदेशों से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि डॉलर, पाउंड और यूरो के रूप में आई है।
45 हजार श्रमिकों का था प्रदर्शन
पुलिस जांच के अनुसार, 13 अप्रैल को नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में करीब 80 स्थानों पर 40,000 से 45,000 श्रमिक इकट्ठा हुए थे, जिससे शहर की व्यवस्था ठप हो गई थी। पुलिस सत्यम वर्मा और आकृति को इस आगजनी और अशांति का मुख्य सूत्रधार मान रही है। सत्यम को 19 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि सत्यम ने विदेशी फंड को अपने अन्य निजी खातों में ट्रांसफर किया। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले के मानवाधिकार और कानूनी पहलुओं पर सुनवाई करेगा।
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