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Karnataka: कंबाला से जुड़ी याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, कहा सिर्फ खास इलाकों तक ही क्यों रखें संस्कृति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Tue, 10 Mar 2026 03:43 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में कंबाला आयोजन को सीमित करने की मांग वाली PETA इंडिया की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि परंपरागत खेल को सिर्फ दक्षिण कन्नड़ और उडुपी तक सीमित क्यों रखा जाए, अन्य क्षेत्रों को भी संस्कृति से परिचित होने दिया जाए।

Supreme Court dismisses Kambala petition asks why culture should be confined to specific areas only
करूर भगदड़ हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने आज कर्नाटक में कंबाला के आयोजन को लेकर दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया। दक्षिण कन्नड़ और उडुपी ज़िलों के अलावा दूसरे हिस्सों में भैंसों की दौड़ का खेल 'कंबाला' आयोजित करने के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने पूछा कि इसे सिर्फ़ राज्य के एक खास इलाके तक ही क्यों सीमित रखा जाए।

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कर्नाटक में नवंबर और मार्च के बीच होने वाली कंबाला दौड़ में भैंसों की एक जोड़ी को हल से बांधा जाता है और एक व्यक्ति उसे नियंत्रित करता है। इस प्रतिस्पर्धा में उन्हें एक कीचड़ से भरे ट्रैक में एक साथ दौड़ाया जाता है, जिसमें सबसे तेज़ दौड़ने वाली टीम जीतती है।

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जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के 14 नवंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने राज्य को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के दो ज़िलों के बाहर किसी भी जगह को कंबाला के आयोजन के लिए सूचित करने से रोकने की अर्ज़ी को खारिज कर दिया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने कहा अगर वे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संस्कृति दिखाना चाहते हैं, तो इसमें क्या गलत है? राज्य के दूसरे हिस्सों के लोगों को भी संस्कृतिसे परिचित होने दें। इसे सिर्फ़ एक खास इलाके तक ही क्यों सीमित रखा जाए?"

पेटा इंडिया की ओर से पेश वकील ने राज्य द्वारा पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे का जिक्र किया, जो उस समय कंबाला से जुड़ी याचिकाओं पर विचार कर रहा था। वकील ने कहा कि उस हलफनामे में, राज्य ने कहा था कि यह एक ऐसा खेल है जो कर्नाटक के दो तटीय जिलों में पारंपरिक है।

वकील ने तर्क दिया इसका बेंगलुरु की परंपरा और संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है और कहा कि अब, यह कार्यक्रम राज्य की राजधानी के एक मैदान में होगा। याचिका खारिज करते हुए, बेंच ने कहा, इनमें से किसी दिन, हम पेटा से भी कुछ सवाल पूछ सकते हैं।

मई 2023 में, सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान बेंच ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक के संशोधन कानूनों की वैधता को बरकरार रखा, जिसमें बैलों को काबू करने वाले खेल 'जलीकट्टू', बैलगाड़ी दौड़ और भैंसों की दौड़ वाले खेल कंबाला को इजाज़त दी गई थी, और कहा कि ये वैध कानून हैं।

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