शीर्ष कोर्ट: रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग, याचिका खारिज; कृष्ण जन्मभूमि मामले की सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका को एक अन्य याचिका के साथ टैग करने से भी इनकार कर दिया, जिसमें स्मारक को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 'रामसेतु' को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में रामसेतु साइट पर एक दीवार के निर्माण के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई थी। याचिका पर न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सुनवाई की। याचिका हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने अध्यक्ष अशोक पांडे के माध्यम से दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक प्रशासनिक फैसला है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि कोर्ट दीवार बनाने का निर्देश कैसे दे सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका को एक अन्य याचिका के साथ टैग करने से भी इनकार कर दिया, जिसमें स्मारक को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि भूमि विवाद मामले को सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के संबंधित रजिस्ट्रार को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि भूमि विवाद से संबंधित उन मुकदमों के विवरण भी मांगे, जो अदालत में निपटाए जा रहे हैं।
चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नौ अक्तूबर को
कौशल विकास घोटाले में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से उन दस्तावेजों का पूरा संकलन पेश करने को कहा, जो हाईकोर्ट के सामने पेश किए गए थे। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई नौ अक्तूबर के लिए तय कर दी।
जमानत के दौरान आरोपी से फोन लोकेशन मांगना निजता का उल्लंघन?... सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस बात की जांच करने को तैयार हो गया कि क्या आरोपी को अपने फोन से जांचकर्ताओं को उसकी लोकेशन बताने वाली जमानत की शर्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए गूगल पिन जांचकर्ताओं को बताने की शर्त लगाई थी। शीर्ष अदालत की नौ जजों की संविधान पीठ ने 24 अगस्त, 2017 को सुनाए एक ऐतिहासिक फैसले में सर्वसम्मति से घोषणा की थी कि निजता का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।
जस्टिस एएस ओका और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह जमानत पर छूटे आरोपी की निजता के अधिकार का उल्लंघन है। पीठ ने पूछा, आप हमें ऐसी स्थिति के व्यावहारिक प्रभाव के बारे में बताएं। एक बार जब कोई व्यक्ति स्वतंत्र हो जाता है, तो कुछ शर्तें लगाई जाती हैं। लेकिन यहां आप जमानत मिलने के बाद की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, क्या यह निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस साल 8 फरवरी को ऑडिटर रमन भूरारिया को जमानत दी थी। उन्हें शक्ति भोग फूड्स लिमिटेड के खिलाफ कथित 3,269 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता मामले से उत्पन्न मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट की लगाई तमाम जमानत शर्तों में से एक में कहा गया था कि भूरारिया को अपने फोन से जांच अधिकारी को लोकेशन भेजनी होगी। पूरी जमानत अवधि में उसे फोन की लोकेशन चालू रखनी होगी। शीर्ष अदालत अब इस मामले में 12 दिसंबर को सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने बाल कल्याण समिति को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) से गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद के दो नाबालिग बेटों की रिहाई पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है। न्यायमूर्ति एस आर भट्ट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने प्राधिकरण को मारे गए गैंगस्टर के बेटों की रिहाई पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत 15 और 17 साल के बच्चों की कस्टडी की मांग करने वाली शाहीन अहमद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान, अहमद की बहन शाहीन अहमद की ओर से पेश वकील निज़ाम पाशा ने कहा कि उनमें से एक लड़का जल्द ही वयस्क होने वाला है और इसलिए उसे कल्याण गृह में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने रिश्तेदार के साथ रहने की अनुमति दी जा सकती है। पीठ ने दलीलों पर गौर किया और सीडब्ल्यूसी से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी।
मवेशी बाजार के खिलाफ याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद पर लगने वाले मवेशी बाजार के खिलाफ दाखिल याचिका पर विचार करने से मंगलवार को इन्कार कर दिया। याचिका में दिल्ली राज्य पशु कल्याण सलाहकार बोर्ड को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी कि कानून के अनुसार सक्षम अथॉरिटी की पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली में बकरीद के मौके पर कोई भी मवेशी बाजार न लगाया जाए। साथ ही याचिकाकर्ता ने पशु क्रूरता निवारण नियम, 2017 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिकाकर्ता अजय गौतम को स्पष्ट रूप से कहा कि वह खाद्य सुरक्षा अधिनियम सहित विभिन्न अधिनियमों के तहत उपयुक्त अथॉरिटी से संपर्क करें।