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NOTA से क्या बेहतर हुए जनप्रतिनिधि?: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, महिलाओं की भागीदारी की सराहना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 24 Feb 2026 04:39 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प के प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि इससे देश में चुने गए प्रतिनिधियों की गुणवत्ता में कोई सुधार हुआ है या नहीं। अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें मांग की गई है कि नोटा का विकल्प हर चुनाव में अनिवार्य किया जाए, यहां तक कि उन सीटों पर भी जहां केवल एक ही उम्मीदवार मैदान में हो।
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कमजोर वर्ग की चुनाव में भागीदारी अधिक- कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मौखिक टिप्पणियों में कहा कि भारत में पढ़े-लिखे और संपन्न वर्ग की तुलना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मतदान भागीदारी ज्यादा रहती है। जस्टिस बागची ने कहा, क्या नोटा से निर्वाचित नेताओं की गुणवत्ता बेहतर हुई है? आंकड़े बताते हैं कि शिक्षित और संपन्न लोग कम वोट डालते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ज्यादा मतदान करता है।
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महिला वोटर्स की संख्या लगातार बढ़ी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कभी-कभी हमें लगता है कि हमें कोई ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जो जरूरी हो, लेकिन सख्त न हो, ताकि लोग जाकर वोट दें। सिस्टम सजा देने वाला न हो। ग्रामीण इलाकों में.. जिन महिलाओं को मजदूरी या कंस्ट्रक्शन के काम करने से छूट मिली हुई है.. वे राहत की सांस लेती हैं जब वे ग्रुप में वोट डालने जाती हैं, गाने गाती हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने यह भी कहा, महिला वोटर्स की संख्या लगातार बढ़ी है।
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