{"_id":"6a0c3c21124afc90e409c29f","slug":"supreme-court-hearing-noida-violence-cases-up-government-notice-journalist-plea-2026-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: नोएडा हिंसा के दो मामलों पर कोर्ट में सुनवाई, पत्रकार की याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस जारी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: नोएडा हिंसा के दो मामलों पर कोर्ट में सुनवाई, पत्रकार की याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 19 May 2026 04:03 PM IST
विज्ञापन
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा हिंसा के दो मामले में सुनवाई की। इसमें एक याचिका में पुलिस हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है। जबकि दूसरे मामले में एक पत्रकार ने एनएसए के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। पढ़िए रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
नोएडा श्रमिक प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मगंलवार को एक याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका केशव आनंद ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई आदित्य आनंद और सह-आरोपी रूपेश रॉय को हिरासत में प्रताड़ित किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अप्रैल के मध्य में नोएडा फेज-2 में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया था।
इससे पहले 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को दोनों आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था। आज दोनों आरोपी न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ के सामने हाजिर हुए।
याचिकाकर्ताओं ने की सीबीआई जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कथित प्रताड़ना की सीबीआई जांच की मांग की। वकील ने कहा कि दोनों आरोपी इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में सुरक्षित हैं, लेकिन पुलिस हिरासत में उन्हें प्रताड़ित किया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों आरोपियों से बातचीत की और उनका हालचाल पूछा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि हिंसा कैसे शुरू हुई। दोनों आरोपियों ने बताया कि उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई, उन्हें पकड़कर पीसीआर वैन से बाहर घसीटा गया और उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनकी पिटाई की।
विज्ञापन
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वह दोनों आरोपियों को सामने देखकर संतुष्ट है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें पेश करने का आदेश इसलिए दिया गया था, ताकि उनकी शारीरिक स्थिति देखी जा सके। कोर्ट ने कहा कि वह हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों की विस्तार से बाद में जांच करेगा।
यूपी पुलिस को दिया निर्देश
कोर्ट ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रखने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि इन आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। मामला अपने कानूनी तरीके से आगे बढ़ेगा। हिरासत में प्रताड़ना से जुड़ी यह याचिका किसी भी पक्ष के मामले को प्रभावित नहीं करेगी। कानून को अपना काम करने दिया जाए।
पत्रकार की याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस
कोर्ट ने मामले में एक अन्य आरोपी की याचिका पर भी सुनवाई जारी रखी। आरोपी ने खुद को पत्रकार बताया है। उसका कहना है कि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है और नोएडा प्रदर्शन मामले में उसके खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। उसके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में हिरासत आदेश को चुनौती दी।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 20 मई से होने वाली बस हड़ताल पर लगाई रोक, परिवहन यूनियनों को बड़ा झटका
आरोपी पत्रकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि पुलिस ने उन पर अपनी विचारधारा के जरिये अशांति फैलाने का आरोप लगाया है।उन्होंने कहा कि इसकी आशंका है कि मजदूरों ने हिंसा की होगी, लेकिन उनके मुवक्किल पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना था। लेकिन बाद में वह हिंसक हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में आरोपी पत्रकार की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। पत्रकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है। ..
Trending Videos
इससे पहले 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को दोनों आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था। आज दोनों आरोपी न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ के सामने हाजिर हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं ने की सीबीआई जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कथित प्रताड़ना की सीबीआई जांच की मांग की। वकील ने कहा कि दोनों आरोपी इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में सुरक्षित हैं, लेकिन पुलिस हिरासत में उन्हें प्रताड़ित किया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों आरोपियों से बातचीत की और उनका हालचाल पूछा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि हिंसा कैसे शुरू हुई। दोनों आरोपियों ने बताया कि उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई, उन्हें पकड़कर पीसीआर वैन से बाहर घसीटा गया और उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनकी पिटाई की।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वह दोनों आरोपियों को सामने देखकर संतुष्ट है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें पेश करने का आदेश इसलिए दिया गया था, ताकि उनकी शारीरिक स्थिति देखी जा सके। कोर्ट ने कहा कि वह हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों की विस्तार से बाद में जांच करेगा।
यूपी पुलिस को दिया निर्देश
कोर्ट ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रखने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि इन आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। मामला अपने कानूनी तरीके से आगे बढ़ेगा। हिरासत में प्रताड़ना से जुड़ी यह याचिका किसी भी पक्ष के मामले को प्रभावित नहीं करेगी। कानून को अपना काम करने दिया जाए।
पत्रकार की याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस
कोर्ट ने मामले में एक अन्य आरोपी की याचिका पर भी सुनवाई जारी रखी। आरोपी ने खुद को पत्रकार बताया है। उसका कहना है कि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है और नोएडा प्रदर्शन मामले में उसके खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। उसके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में हिरासत आदेश को चुनौती दी।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 20 मई से होने वाली बस हड़ताल पर लगाई रोक, परिवहन यूनियनों को बड़ा झटका
आरोपी पत्रकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि पुलिस ने उन पर अपनी विचारधारा के जरिये अशांति फैलाने का आरोप लगाया है।उन्होंने कहा कि इसकी आशंका है कि मजदूरों ने हिंसा की होगी, लेकिन उनके मुवक्किल पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना था। लेकिन बाद में वह हिंसक हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में आरोपी पत्रकार की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। पत्रकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है। ..