फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court news updates plea against paper leak

Supreme Court: पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका

Mon, 13 Jul 2026 04:00 PM IST
नितिन गौतम आईएएनएस, अमर उजाला
आईएएनएस, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 13 Jul 2026 04:00 PM IST
विज्ञापन
supreme court news updates plea against paper leak
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे देश भर में पेपर लीक मामलों की समय-सीमा के भीतर जांच और तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक मानक प्रश्नावली और विशेष जांच प्रक्रिया तैयार करें। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में भ्रष्टाचार विरोधी, मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और काले धन कानूनों के प्रावधानों को लागू करने के अलावा, पेपर लीक के अपराधियों और अपराध में कथित रूप से शामिल उनके परिवार के सदस्यों की चल और अचल संपत्तियों की जब्ती के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है।
विज्ञापन


याचिका में, जिसमें केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, साथ ही भारत के विधि आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है, यह तर्क दिया गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक के देशव्यापी प्रभाव होते हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। याचिका में कहा गया है, 'पेपर लीक का देशव्यापी असर हुआ है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों पर बुरा असर पड़ा है और कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली है।'
विज्ञापन


याचिका के अनुसार, पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों को रोकने, जांच करने और प्रभावी ढंग से मुकदमा चलाने में अधिकारियों की लगातार विफलता के परिणामस्वरूप संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में 3 मई, 2026 को कथित एनईईटी पेपर लीक का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस घटना ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया और परीक्षा संबंधी अपराधों से निपटने में प्रणालीगत कमियों को उजागर किया। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्रों को वित्तीय कठिनाई, शैक्षिक और रोजगार के अवसरों की हानि, गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याएं, बढ़ती आत्महत्याओं का बोझ झेलना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पारसनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज किए

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पारसनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने का आदेश दिया। साथ ही कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों द्वारा अपने घर का कब्जा पाने के लिए पिछले 20 वर्षों से किए जा रहे संघर्ष का संज्ञान लेते हुए यह सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने नियामक प्राधिकरणों की निष्क्रियता पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने हरियाणा सरकार के तंत्र और बिल्डर के बीच संभावित मिलीभगत की भी आशंका व्यक्त की।

मामला कैंसर से उबर चुकीं रीता टिक्कू और लोकेश टिक्कू की ओर से दायर याचिका से संबंधित है। दोनों ने गुरुग्राम के सेक्टर-53 स्थित पारसनाथ एक्सोटिका परियोजना में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश की थी। याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2006 में आवासीय इकाइयां आवंटित की गई थीं और वर्ष 2007 की शुरुआत में फ्लैट खरीदार समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। करीब 1.78 करोड़ रुपये की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद उन्हें वर्ष 2013 तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। दो दशक बीत जाने के बाद भी परियोजना अब तक अधूरी है।

याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2021 में हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (एचआरईआरए) से राहत मिली थी, जिसने बिल्डर को मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, बिल्डर ने न तो उस आदेश को चुनौती दी और न ही उसका पालन किया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'आदेश के क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया निरर्थक होकर रह गई है।' उन्होंने कहा कि एचआरईआरए द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बावजूद उनका कभी पालन नहीं कराया गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जिला कलेक्टर और स्थानीय पुलिस या तो बिल्डरों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं या फिर अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहे हैं।' यह सुनिश्चित करने के लिए कि बिल्डर आगे भी न्यायिक प्रक्रिया से बच न सके, पीठ ने पारसनाथ हेसा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पारसनाथ डेवलपर्स लिमिटेड तथा उनके प्रबंध निदेशकों और निदेशकों के व्यक्तिगत बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने का आदेश दिया।
 

गोवध निषेध कानूनों के सख्ती से पालन कराने की मांग, सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्यों को गायों और उनके बछड़ों को वध से बचाने के लिए लागू गोवध निषेध कानूनों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पशुओं के वध से जुड़े वर्ष 2005 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संबंधित अधिकारी पालन नहीं कर रहे हैं।

इस पर पीठ ने कहा, अगर किसी न्यायिक आदेश का उल्लंघन हो रहा है तो आप अवमानना याचिका दायर करें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed