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TMC की शहीद दिवस रैली पर सस्पेंस: पुलिस ने ममता को नहीं दी अनुमति, अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकीं निगाहें
Mon, 13 Jul 2026 03:50 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 13 Jul 2026 03:50 PM IST
सार
टीएमसी की 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली इस बार कानूनी विवाद में फंस गई है। पुलिस ने अनुमति देने से इनकार किया है, जबकि पार्टी का कहना है कि यह उसका हर साल होने वाला कार्यक्रम है। दूसरी ओर, उसी स्थान पर बागी गुट को मिली अनुमति ने विवाद को और बढ़ा दिया है। अब इस पूरे मामले का फैसला कलकत्ता हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
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ममता बनर्जी, पूर्व मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को होने वाली तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इस मामले की सुनवाई 15 जुलाई को होगी। अदालत के फैसले के बाद ही यह साफ होगा कि पार्टी को एस्प्लेनेड में रैली करने की अनुमति मिलेगी या नहीं।
क्यों विवाद में फंसी 21 जुलाई की रैली?
टीएमसी ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि उसने एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के सामने हर साल की तरह शहीद दिवस रैली आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने आवेदन पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन ने जानबूझकर अनुमति देने में देरी की, जिसके बाद उसे अदालत का रुख करना पड़ा। सोमवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए 15 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय कर दी।
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
पुलिस ने अनुमति क्यों नहीं दी?
कोलकाता पुलिस का कहना है कि एस्प्लेनेड और आसपास के इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रैली की अनुमति नहीं दी गई।
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बागी गुट ने बढ़ाई मुश्किलें
मामला इसलिए और पेचीदा हो गया है क्योंकि टीएमसी से अलग हुए बागी गुट ने भी 21 जुलाई को उसी स्थान पर रैली करने का दावा किया है। इस गुट का नेतृत्व विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों पक्षों के एक ही दिन और एक ही जगह कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि बागी गुट को रैली की अनुमति मिल गई है।
यह भी पढ़ें: 'सब्जियों की तरह टीटीई बेचते हैं बर्थ': यात्री की मौत पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, रेलवे को दिया कार्रवाई का आदेश
अब हाईकोर्ट पर टिकी निगाहें
टीएमसी का कहना है कि 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली पार्टी का ऐतिहासिक और वार्षिक कार्यक्रम है। वहीं पुलिस सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला दे रही है। ऐसे में अब 15 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई ही तय करेगी कि रैली को अनुमति मिलेगी या नहीं और यदि मिलेगी तो किन शर्तों के साथ।
टीएमसी क्यों मनाती है शहीद दिवस?
21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) हर साल 'शहीद दिवस' मनाती है। इसकी शुरुआत 1993 की उस घटना की याद में हुई, जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। उस समय उन्होंने मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र को अनिवार्य करने की मांग को लेकर कोलकाता में राइटर्स बिल्डिंग तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें 13 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। ममता बनर्जी इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दिया गया बलिदान मानती हैं।
1998 में तृणमूल कांग्रेस बनने के बाद से पार्टी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली आयोजित करती है। यह सिर्फ श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि टीएमसी के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने और भविष्य की रणनीति का संदेश देने वाला सबसे बड़ा वार्षिक मंच भी माना जाता है।
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क्यों विवाद में फंसी 21 जुलाई की रैली?
टीएमसी ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि उसने एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के सामने हर साल की तरह शहीद दिवस रैली आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने आवेदन पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन ने जानबूझकर अनुमति देने में देरी की, जिसके बाद उसे अदालत का रुख करना पड़ा। सोमवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए 15 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय कर दी।
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मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- 21 जुलाई की टीएमसी शहीद दिवस रैली की अनुमति पर विवाद खड़ा हो गया है।
- कोलकाता पुलिस ने एस्प्लेनेड में ममता बनर्जी को रैली की अनुमति नहीं दी है।
- पुलिस ने BNS की धारा 163 लागू होने का हवाला दिया है।
- टीएमसी के साथ बागी गुट ने भी उसी दिन उसी स्थान पर रैली का दावा किया है।
- पूरे मामले पर 15 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
पुलिस ने अनुमति क्यों नहीं दी?
कोलकाता पुलिस का कहना है कि एस्प्लेनेड और आसपास के इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रैली की अनुमति नहीं दी गई।
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बागी गुट ने बढ़ाई मुश्किलें
मामला इसलिए और पेचीदा हो गया है क्योंकि टीएमसी से अलग हुए बागी गुट ने भी 21 जुलाई को उसी स्थान पर रैली करने का दावा किया है। इस गुट का नेतृत्व विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों पक्षों के एक ही दिन और एक ही जगह कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि बागी गुट को रैली की अनुमति मिल गई है।
यह भी पढ़ें: 'सब्जियों की तरह टीटीई बेचते हैं बर्थ': यात्री की मौत पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, रेलवे को दिया कार्रवाई का आदेश
अब हाईकोर्ट पर टिकी निगाहें
टीएमसी का कहना है कि 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली पार्टी का ऐतिहासिक और वार्षिक कार्यक्रम है। वहीं पुलिस सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला दे रही है। ऐसे में अब 15 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई ही तय करेगी कि रैली को अनुमति मिलेगी या नहीं और यदि मिलेगी तो किन शर्तों के साथ।
टीएमसी क्यों मनाती है शहीद दिवस?
21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) हर साल 'शहीद दिवस' मनाती है। इसकी शुरुआत 1993 की उस घटना की याद में हुई, जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। उस समय उन्होंने मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र को अनिवार्य करने की मांग को लेकर कोलकाता में राइटर्स बिल्डिंग तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें 13 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। ममता बनर्जी इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दिया गया बलिदान मानती हैं।
1998 में तृणमूल कांग्रेस बनने के बाद से पार्टी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली आयोजित करती है। यह सिर्फ श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि टीएमसी के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने और भविष्य की रणनीति का संदेश देने वाला सबसे बड़ा वार्षिक मंच भी माना जाता है।