क्या बांकीपुर का चुनाव अब सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि सियासी टकराव का अखाड़ा बन चुका है? क्या नामांकन के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी महज कानूनी कार्रवाई है या फिर विपक्ष के आरोपों के मुताबिक चुनावी साजिश? आखिर क्यों तेज प्रताप यादव इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं? और अब बिहार लौटकर किस बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बांकीपुर सीट पर सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। जनशक्ति जनता दल यानी जेजेडी की प्रत्याशी वीणा मानवी को सोमवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वह अपना नामांकन दाखिल कर चुकी थीं। बताया जा रहा है कि सोमवार को उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ था, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
इस कार्रवाई के बाद मामला सीधे राजनीतिक विवाद में बदल गया और जेजेडी ने इसे चुनाव प्रभावित करने की कोशिश करार दिया।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीणा मानवी को झूठे मामले में फंसाकर उनकी चुनावी प्रक्रिया बाधित करने का प्रयास किया गया है। तेज प्रताप ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी अपनी प्रत्याशी के साथ मजबूती से खड़ी है और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगी।
तेज प्रताप ने यह भी दावा किया कि बांकीपुर की जनता सत्य और न्याय के साथ खड़ी है और अंततः सच्चाई की जीत होगी।
दिल्ली से जारी अपने वीडियो संदेश में तेज प्रताप यादव ने इस कार्रवाई को बड़ी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि वह जल्द बिहार लौटेंगे और सरकार का घेराव करेंगे। तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि वीणा मानवी पिछले तीन दिनों से लगातार चुनाव क्षेत्र में प्रचार कर रही थीं। यदि पुलिस को गिरफ्तारी करनी ही थी तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उनके मुताबिक, नामांकन के बाद की गई कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।
उन्होंने दावा किया कि वीणा मानवी चुनाव में मजबूत स्थिति में थीं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।
अपने बयान में तेज प्रताप यादव ने धार्मिक संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला के साथ अन्याय होता है तो कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलता है। उनका कहना था कि बिहार लौटने के बाद उनका भी "सुदर्शन चक्र" चलेगा। साथ ही उन्होंने पटना पहुंचते ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का पर्दाफाश करने का दावा किया।
अब इस गिरफ्तारी ने बांकीपुर के चुनावी मुकाबले को और अधिक राजनीतिक बना दिया है। एक ओर पुलिस अपनी कानूनी कार्रवाई पर कायम है, तो दूसरी ओर जेजेडी इसे राजनीतिक साजिश बताकर सरकार पर हमलावर है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरफ्तारी केवल कानून के तहत हुई कार्रवाई है या फिर चुनावी राजनीति का नया विवाद? इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच, अदालत और चुनावी मैदान तीनों जगह तलाशा जाएगा। फिलहाल बांकीपुर की सियासत में यह मुद्दा सबसे बड़ी बहस बन चुका है।
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