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Supreme Court: पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का मामला, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 18 May 2026 01:10 PM IST
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supreme court news updates sc refuses to entertain PIL for reviewing wages of priests temple staff
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य सरकारों के नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों, सेवादारों और अन्य कर्मचारियों के वेतन व सुविधाओं की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी।
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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि कोई पक्ष वास्तव में प्रभावित है तो वह सीधे अदालत का रुख कर सकता है। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से कहा कि उन्हें पुजारियों के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उन्हें मंदिरों के पुजारियों और सेवदारों की वास्तविक आय की जानकारी न हो।
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उपाध्याय ने दलील दी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत कई उच्च न्यायालयों ने राज्य नियंत्रित मंदिरों के पुजारियों के वेतन की समीक्षा कर उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की जरूरत बताई है। हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए उपाध्याय को इसे वापस लेने की अनुमति दे दी और कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपाय अपनाने की छूट भी प्रदान की।
 

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की मतगणना पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) चुनाव में कथित छेड़छाड़ के आरोपों के बीच सोमवार को मतगणना पर रोक लगा दी और दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की रोजाना सुनवाई करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बिरेंद्र सांगवान और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

पीठ ने मामले को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ को स्थानांतरित करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि इस विवाद की सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित की जाए और मामले की दिन-प्रतिदिन सुनवाई हो।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि जब तक हाईकोर्ट फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की आगे की गिनती रोक दी जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और सभी पक्ष हाईकोर्ट में अपनी दलीलें रखने के लिए स्वतंत्र हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि बार के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता दांव पर लगी हुई है।
 
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