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Supreme Court: 'जमानत नियम है, जेल अपवाद', उमर खालिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; पुराने फैसले पर जताई आपत्ति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 18 May 2026 01:22 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम से जुड़े पुराने जमानत फैसले के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि यूएपीए मामलों में भी जमानत नियम और जेल अपवाद होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में शरजील इमाम, उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से जुड़े अपने पुराने फैसले के कुछ पहलुओं पर गंभीर टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) जैसे सख्त कानूनों के मामलों में भी जमानत नियम है और जेल अपवाद होना चाहिए। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने जम्मू-कश्मीर में ड्रग तस्करी और आतंक फंडिंग से जुड़े एक मामले में आरोपी को जमानत देते समय की।
पुराने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनवरी में शीर्ष अदालत की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते समय तीन-न्यायाधीशों वाली पीठ के एक महत्वपूर्ण फैसले का सही तरीके से पालन नहीं किया था। तीन-न्यायाधीशों की उस पीठ ने माना था कि यदि किसी मामले में ट्रायल में अत्यधिक देरी हो रही है, तो यह जमानत देने का एक वैध आधार हो सकता है, भले ही मामला यूएपीए के तहत दर्ज हो।
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पुराने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनवरी में शीर्ष अदालत की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते समय तीन-न्यायाधीशों वाली पीठ के एक महत्वपूर्ण फैसले का सही तरीके से पालन नहीं किया था। तीन-न्यायाधीशों की उस पीठ ने माना था कि यदि किसी मामले में ट्रायल में अत्यधिक देरी हो रही है, तो यह जमानत देने का एक वैध आधार हो सकता है, भले ही मामला यूएपीए के तहत दर्ज हो।
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