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Supreme Court: मद्रास हाईकोर्ट के जज के खिलाफ बयानबाजी का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार से मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 28 Jan 2026 03:34 PM IST
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सार

मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के जज जस्टिस जी आर स्वामीनाथन के खिलाफ कथित तौर पर की गई जाति और धर्म आधारित टिप्पणी को लेकर शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार से जवाब तलब किया है। आइए जानते है पूरा मामला

Supreme Court  notice on plea seeking action on protestors for remarks against Justice Swaminathan
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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धार्मिक परंपरा, कानून और न्यायपालिका की मर्यादा से जुड़े एक संवेदनशील मामले में सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस जी आर स्वामीनाथन के खिलाफ कथित अपमानजनक बयानों और प्रदर्शनों को लेकर तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति से जुड़ा हुआ है।

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मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने तमिलनाडु सरकार, राज्य के डीजीपी, चेन्नई पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अब मामले में अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
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अब समझिए क्या है पूरा मामला?
यह याचिका वकील जीएस मणि ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्तारूढ़ डीएमके समर्थित दलों, कुछ कम्युनिस्ट पार्टियों, कुछ व्यक्तियों और वकीलों ने मिलकर अवैध प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन न सिर्फ सार्वजनिक जगहों पर हुए, बल्कि मद्रास हाईकोर्ट के परिसर में भी किए गए।

याचिका के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ जाति और धर्म के आधार पर अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की गईं। आरोप है कि इसका मकसद समाज में तनाव फैलाना और कानून-व्यवस्था तथा सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना था।

याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि तमिलनाडु सरकार और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करें। इसमें आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की भी मांग की गई है।

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अब समझिए पूरा मामला
बता दें कि यह विवाद जस्टिस स्वामीनाथन के एक आदेश के बाद शुरू हुआ। एक दिसंबर 2025 को उन्होंने एक आदेश में कहा था कि मदुरै के थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित ‘दीपथून’ नामक पत्थर के दीप स्तंभ पर कार्तिगई दीपम का तेल का दीया जलाने की अनुमति दी जाए। यह जगह एक दरगाह के पास है। अपने आदेश में जज ने साफ कहा था कि दीप जलाने से दरगाह की संरचना पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि दरगाह उस स्थान से करीब 50 मीटर दूर स्थित है।

दूसरा आदेश और विवाद बढ़ा
जब इस आदेश को लागू नहीं किया गया, तो 3 दिसंबर 2025 को जस्टिस स्वामीनाथन ने एक और आदेश दिया। इसमें उन्होंने भक्तों को खुद दीप जलाने की अनुमति दी और सीआईएसएफ को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले में राज्य सरकार से जवाब का इंतजार कर रहा है। कोर्ट यह देखेगा कि जज के खिलाफ की गई बयानबाजी और प्रदर्शन कानून के दायरे में आते हैं या नहीं, और क्या दोषियों पर कार्रवाई हुई है या नहीं।

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