CISF: समुद्री किनारों पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के खतरों से यूं निपटेगी CISF; मददगार बनेंगे तटीय समुदाय
देश के समुद्री किनारों पर ड्रग्स, हथियार और विस्फोटकों की तस्करी के खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ ने अनूठी योजना बनाई है। इस तरह की सूचना, सीआईएसएफ को समय रहते मिल जाए, इसके लिए तटीय समुदायों को मददगार बनाया जाएगा। इसके लिए सीआईएसएफ 'वंदे मातरम् तटीय साइक्लोथॉन–2026' आयोजित किया जा रहा है। बुधवार को नई दिल्ली में स्थित मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में वर्चुअल माध्यम से इस साइक्लोथॉन का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साइक्लोथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 25 दिन के इस विशाल राष्ट्रीय अभियान में सीआईएसएफ की दो साइक्लिंग टीमें, एक साथ बक्कखाली (पश्चिम बंगाल) एवं लखपत (गुजरात) से रवाना हुईं हैं। ये टीमें देश के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों से लगते क्षेत्रों में लगभग 6,500 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। नौ तटीय राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से गुजरने वाला यह साइक्लोथॉन 22 फरवरी को कोच्चि में समाप्त होगा।
सीआईएसएफ के मुताबिक, कोस्टल साइक्लोथॉन-2026 का लक्ष्य, तटीय समुदायों को ड्रग्स, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी जैसे खतरों के बारे में जागरूक करना है। समुद्री किनारों पर सतर्कता को लेकर तटीय समुदायों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस कोस्टल साइक्लोथॉन के जरिए एक मजबूत तटीय सुरक्षा नेटवर्क बनेगा। इसके माध्यम से तटीय समुदायों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच साझेदारी को मजबूत करना है। स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों, सुरक्षा कर्मियों और उनके परिवारों के बलिदानों का सम्मान करके वंदे मातरम की भावना को सुदृढ़ करना है। भारत की समृद्ध समुद्री विरासत, परंपराओं, इतिहास और भूगोल का जश्न मनाना, तटीय समुदायों, विशेष रूप से मछुआरों के अमूल्य योगदान को रेखांकित करना है। युवाओं एवं तटीय समुदायों में फिटनेस, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह पहल मछुआरों सहित तटीय समुदायों की भूमिका को देश के 'तट प्रहरी' के रूप में विशेष रूप से रेखांकित करती है।
यात्रा के दौरान साइक्लोथॉन, 52 तटीय गांवों में रुकेगा, जिन्हें सीआईएसएफ द्वारा एक वर्ष तक सतत सहभागिता के लिए गोद लिया जाएगा। ओएनजीसी, पत्तन प्राधिकरणों और अन्य एजेंसियों के सहयोग से स्थानीय सीआईएसएफ इकाइयां, सीएसआर के अंतर्गत सामुदायिक कल्याण एवं बुनियादी ढांचे से संबंधित गतिविधियाँ संचालित करेंगी। भारत के तटीय क्षेत्रों में स्थित 47 सीआईएसएफ इकाइयों के माध्यम से इन गांवों के साथ दीर्घकालिक संपर्क सुनिश्चित किया जाएगा। युवा सहभागिता, सामाजिक जागरूकता एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, इस निरंतर सहभागिता के अंतर्गत भर्ती जागरूकता अभियान, खेल गतिविधियां और युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। युवाओं को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने की पहल प्रारंभ होगी। युवा सहभागिता और महिला सशक्तिकरण, इस साइक्लोथॉन के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं। उल्लेखनीय है कि साइक्लोथॉन में भाग लेने वाले साइकिल चालकों में 50 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो राष्ट्रीय सेवा पहलों में लैंगिक समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साइक्लोथॉन नागरिकों को अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और राष्ट्रसेवा की भावना अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
साइक्लोथॉन के दौरान मुंबई, गोवा, मंगलुरु, कोणार्क, विशाखापत्तनम और चेन्नई में आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में खेल, संस्कृति, फिल्म जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियां भाग लेंगी। इसका समापन कोच्चि में होगा। वंदे मातरम् तटीय साइक्लोथॉन–2026, विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों को सशक्त बनाना, समुदायों को मजबूत करना और एक सतर्क, स्वस्थ एवं जिम्मेदार नागरिक समाज का निर्माण करना है। महानिदेशक, सीआईएसएफ प्रवीर रंजन ने कहा कि 'वंदे मातरम् तटीय साइक्लोथॉन–2026', वंदे मातरम् के 150 वर्ष के ऐतिहासिक स्मरणोत्सव का एक महत्वपूर्ण अंग है। वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता, बलिदान और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। यह पहल उसी भावना को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक रूप में साकार करने का प्रयास है, ताकि नागरिकों को देश की महत्वपूर्ण समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में सहभागी बनाया जा सके।
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