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Supreme Court: भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी, राज्य सरकार को परिसर के पास नई जगह देने का निर्देश
Tue, 14 Jul 2026 01:32 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:32 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विभिन्न मुस्लिम पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिकाओं पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले से पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते अभी भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी रहेगी।
अदालत ने क्या दिया निर्देश?
पीठ ने हालांकि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास ही अलग जगह दी जाए, जहां मुस्लिम शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। पीठ ने साफ किया कि अंतिम फैसले तक यह निर्देश अस्थायी है। मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी की याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि एएसआई, बिना अदालत की मंजूरी के भोजशाला परिसर में ढांचागत बदलाव नहीं करेगा।
पीठ ने कहा कि वे इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का मौका भी नहीं दिया। साल 2003 में एएसआई ने आदेश दिया था कि हफ्ते में एक दिन शुक्रवार को नमाज अदा की जाएगी और एक दिन मंगलवार को पूजा होगी। आज हमें पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है? ये बहुत गलत है।
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मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट करने वाले लोगों से पूछताछ भी नहीं की गई। हुजैफा ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि कुछ जगहों पर मंदिर हो सकते हैं, लेकिन इतिहास में पीछे जाने की जरूरत नहीं है। सिंघवी ने कहा, यहां 700 वर्षों से यहां नमाज हो रही है। 1927 -28 के सर्वे में कहा गया कि ये एक मस्जिद है। एमपी वक्फ एक्ट का नोटिफिकेशन भी यही कहता है। साल 1977 से यहां नमाज के साथ बसंत पंचमी की पूजा भी हो रही है, लेकिन हिंदू पक्ष की रिट याचिका पर आदेश पारित कर दिया गया। इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आदेश को दिए हुए दो महीने बीत चुके हैं। काफी कुछ हो चुका है।
वकील वरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि आज मुस्लिम पक्ष की तरफ से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की तरफ से चार एसएलपी दायर की गईं थी। याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेश से पहले की यथास्थिति बहाल करने की मांग की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई करेगा। तब तक भोजशाला परिसर में किसी भी तरह के ढांचागत बदलाव पर रोक रहेगी।
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अदालत ने क्या दिया निर्देश?
पीठ ने हालांकि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास ही अलग जगह दी जाए, जहां मुस्लिम शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। पीठ ने साफ किया कि अंतिम फैसले तक यह निर्देश अस्थायी है। मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी की याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि एएसआई, बिना अदालत की मंजूरी के भोजशाला परिसर में ढांचागत बदलाव नहीं करेगा।
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पीठ ने कहा कि वे इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का मौका भी नहीं दिया। साल 2003 में एएसआई ने आदेश दिया था कि हफ्ते में एक दिन शुक्रवार को नमाज अदा की जाएगी और एक दिन मंगलवार को पूजा होगी। आज हमें पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है? ये बहुत गलत है।
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मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट करने वाले लोगों से पूछताछ भी नहीं की गई। हुजैफा ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि कुछ जगहों पर मंदिर हो सकते हैं, लेकिन इतिहास में पीछे जाने की जरूरत नहीं है। सिंघवी ने कहा, यहां 700 वर्षों से यहां नमाज हो रही है। 1927 -28 के सर्वे में कहा गया कि ये एक मस्जिद है। एमपी वक्फ एक्ट का नोटिफिकेशन भी यही कहता है। साल 1977 से यहां नमाज के साथ बसंत पंचमी की पूजा भी हो रही है, लेकिन हिंदू पक्ष की रिट याचिका पर आदेश पारित कर दिया गया। इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आदेश को दिए हुए दो महीने बीत चुके हैं। काफी कुछ हो चुका है।
वकील वरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि आज मुस्लिम पक्ष की तरफ से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की तरफ से चार एसएलपी दायर की गईं थी। याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेश से पहले की यथास्थिति बहाल करने की मांग की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई करेगा। तब तक भोजशाला परिसर में किसी भी तरह के ढांचागत बदलाव पर रोक रहेगी।