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Pune: पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे पुणे के 66 लोग! ATS कर रही पूछताछ; जांच में खुलासा?
Tue, 14 Jul 2026 01:41 PM IST
नवीन पारमुवाल
सुनील मेहरोत्रा, अमर उजाला, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:41 PM IST
सार
महाराष्ट्र एटीएस ने पुणे में सोमवार को बड़ा अभियान चलाते हुए 66 लोगों से पूछताछ की है। ये सभी लोग सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके गिरोह के संपर्क में आए थे।
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एटीएस
- फोटो : IANS
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विस्तार
पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर इन दिनों महाराष्ट्र एटीएस का पूरा फोकस है। एटीएस ने सोमवार को पुणे जिले में बड़ा अभियान चलाया। एटीएस की टीमें सुबह सात बजे से शहजाद भट्टी के संपर्क में आए 66 लोगों से पूछताछ कर रही हैं। यह कार्रवाई पुणे शहर पुलिस, पुणे ग्रामीण पुलिस और पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस की मदद से जिले के विभिन्न इलाकों में एक साथ की जा रही है। एटीएस ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि शुरुआती जांच में इन लोगों के सोशल मीडिया के जरिए शहजाद भट्टी के संपर्क में आने के संकेत मिले हैं।
किन बातों की जांच कर रही एटीएस?
एटीएस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संबंधित लोगों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खाते, चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इन लोगों का इस्तेमाल कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने या किसी संगठित नेटवर्क से जोड़ने के लिए तो नहीं किया गया। जांच का मकसद यह भी है कि इस संपर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।
शहजाद भट्टी के साथ और कौन-कौन से संदिग्ध जुड़े?
यह कार्रवाई एटीएस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जो पिछले सप्ताह शुरू किया गया था। गत शुक्रवार को राज्यभर में एटीएस की 14 यूनिट्स की 58 टीमों ने एक साथ 102 स्थानों पर छापेमारी कर शहजाद भट्टी के संपर्क में आए लोगों से पूछताछ की थी। उसी जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि भट्टी अकेला काम नहीं कर रहा, बल्कि उसके साथ आबिद जाट उर्फ आबिद छल, अजमल गुजर, हम्माद मेमन, राणा हुनैन और अशरफ बशीर आलम जैसे कई अन्य संदिग्ध भी सक्रिय हैं। एटीएस का मानना है कि यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं तक पहुंच बनाकर उन्हें बरगलाने, आर्थिक लालच देने और अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसी जांच के क्रम में मिले नए सुरागों के आधार पर अब पुणे में 66 लोगों से पूछताछ की जा रही है।
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एटीएस ने नागरिकों से क्या अपील की?
एटीएस ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें, लालच देने वाले मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। एजेंसी का कहना है कि युवाओं को निशाना बनाकर देशविरोधी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिशों को समय रहते विफल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
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किन बातों की जांच कर रही एटीएस?
एटीएस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संबंधित लोगों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खाते, चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इन लोगों का इस्तेमाल कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने या किसी संगठित नेटवर्क से जोड़ने के लिए तो नहीं किया गया। जांच का मकसद यह भी है कि इस संपर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।
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शहजाद भट्टी के साथ और कौन-कौन से संदिग्ध जुड़े?
यह कार्रवाई एटीएस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जो पिछले सप्ताह शुरू किया गया था। गत शुक्रवार को राज्यभर में एटीएस की 14 यूनिट्स की 58 टीमों ने एक साथ 102 स्थानों पर छापेमारी कर शहजाद भट्टी के संपर्क में आए लोगों से पूछताछ की थी। उसी जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि भट्टी अकेला काम नहीं कर रहा, बल्कि उसके साथ आबिद जाट उर्फ आबिद छल, अजमल गुजर, हम्माद मेमन, राणा हुनैन और अशरफ बशीर आलम जैसे कई अन्य संदिग्ध भी सक्रिय हैं। एटीएस का मानना है कि यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं तक पहुंच बनाकर उन्हें बरगलाने, आर्थिक लालच देने और अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसी जांच के क्रम में मिले नए सुरागों के आधार पर अब पुणे में 66 लोगों से पूछताछ की जा रही है।
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एटीएस ने नागरिकों से क्या अपील की?
एटीएस ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें, लालच देने वाले मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। एजेंसी का कहना है कि युवाओं को निशाना बनाकर देशविरोधी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिशों को समय रहते विफल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।