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सुप्रीम कोर्ट: अरावली पर्वतमाला पर बड़ा फैसला, परिभाषा तय करने वाले पैनल में विशेषज्ञों और जनता की सलाह जरूरी

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 25 May 2026 05:35 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा तय करने के लिए पांच से सात सदस्यों की छोटी समिति बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि समिति विशेषज्ञों और जनता से सलाह ले, ताकि व्यापक स्तर पर जनता की बात सुनी जा सके।

Supreme Court on Monday: Expert committee on Aravalli must consult domain experts other stakeholders
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं को परिभाषित करने के लिए बनने वाली विशेषज्ञ समिति को विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सलाह लेनी चाहिए। कोर्ट का मानना है कि इससे आम जनता की बात बड़े स्तर पर सुनी जा सकेगी।


कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि समिति में बहुत ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते। पीठ के अनुसार, 30 लोगों की समिति को संभालना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि समिति में केवल 5 से 7 सदस्य होने चाहिए और वे विशेषज्ञों से सलाह लें। कोर्ट इस बात को अपने आदेश में भी लिखेगा।
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सुनवाई शुरू होते ही केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति और एमिकस क्यूरी ने कुछ साझा नाम दिए हैं, जिन्हें अब अंतिम रूप दिया जा सकता है। एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील के परमेश्वर ने कहा कि विशेषज्ञ समिति को सभी संबंधित पक्षों का ध्यान रखना चाहिए ताकि जनता की राय ली जा सके।
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अरावली क्षेत्र में सभी खनन गतिविधियों पर है रोक
इससे पहले शीर्ष अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय और अन्य पक्षों से विशेषज्ञों के नाम मांगे थे। यह समिति दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली की परिभाषा तय करेगी। पिछले साल 29 दिसंबर को कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा पर हो रहे विरोध को देखते हुए 20 नवंबर के निर्देशों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में सभी खनन गतिविधियों को भी रोक दिया था।

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अदालत ने कहा कि कुछ जरूरी उलझनों को सुलझाना बहुत आवश्यक है। इसमें यह देखना होगा कि क्या 100 मीटर की ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर की दूरी वाला पैमाना पर्वत श्रृंखला के एक बड़े हिस्से को पर्यावरण सुरक्षा से बाहर कर देगा।

पहले की सुनवाई में क्या?
20 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अरावली की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया था। इसके साथ ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में नए खनन पट्टों पर रोक लगा दी गई थी। पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने सुझाव दिया था कि 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भूभाग को 'अरावली पहाड़ी' माना जाए। वहीं, 500 मीटर के दायरे में आने वाली दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को 'अरावली पर्वतमाला' कहा जाए।
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