Supreme Court: राज्य मानवाधिकार आयोगों में खाली पदों पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, हाईकोर्ट जाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य मानवाधिकार आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पद भरने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी और याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने आज राज्य मानवाधिकार आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने संबंधित उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं किया।
पीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने की अनिच्छा जताई। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से राज्य मानवाधिकार आयोगों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों का मुद्दा उठाया गया।
वकील ने कहा कि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में पिछले दो वर्षों से अध्यक्ष का पद खाली है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह के एक मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट नोटिस जारी कर चुका है। इस पर पीठ ने पूछा कि जब इस विषय पर पहले से मामला चल रहा है, तो अलग याचिका क्यों दायर की गई।
वकील ने बताया कि पहले की याचिका राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में रिक्तियों से संबंधित थी, जबकि वर्तमान याचिका राज्य मानवाधिकार आयोगों के खाली पदों से जुड़ी है।
पीठ ने कहा कि इस प्रकार के मामलों की निगरानी संबंधित उच्च न्यायालय कर रहे हैं। इसलिए याचिकाकर्ता को पहले वहां जाना चाहिए था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह मामला कई राज्यों से जुड़ा है और उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के निष्क्रिय होने का खतरा है।
याचिका में मांग की गई थी कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पद जल्द भरे जाएं। इसके अलावा याचिका में आयोगों में रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा मांगा गया था। इसमें यह जानकारी भी देने की मांग की गई थी कि कौन-कौन से पद कब से खाली हैं और चयन प्रक्रिया किस चरण में है।