फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court rules juvenile can be tried as adult in murder cases jj act

जघन्य अपराध पर कोई रियायत नहीं!: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- हत्या के आरोपी नाबालिग पर चलेगा बालिग जैसा केस

Wed, 22 Jul 2026 06:50 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 22 Jul 2026 06:50 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम, 2015 के तहत हत्या (धारा 302) एक 'जघन्य अपराध' की श्रेणी में आती है, क्योंकि इसमें न्यूनतम सजा आजीवन कारावास से कम नहीं हो सकती। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने बिहार के 16 वर्षीय नाबालिग की अपील खारिज करते हुए पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने का निर्देश दिया गया था। 
 

विज्ञापन
supreme court rules juvenile can be tried as adult in murder cases jj act
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कानूनी शर्त पूरी होती हो तो हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है क्योंकि किशोर न्याय कानून (जेजे एक्ट) के तहत ऐसा अपराध जघन्य अपराध माना जाता है।
विज्ञापन


जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह बात एक नाबालिग की अपील को खारिज करते हुए कही। यह अपील पटना हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ थी जिसमें एक लड़के की हत्या के मामले में उस नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की इजाजत दी गई थी। नाबालिगों पर बालिगों की तरह मुकदमा चलाने के कानूनी ढांचे को स्पष्ट करने वाले इस फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा, हत्या (भादंसं की धारा 302) को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत जघन्य अपराध के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए। इस मामले में आरोपी नाबालिग पर बिहार में एक लड़के का गला रेतने का आरोप था। नाबालिग की उम्र 16 साल है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा था कि अपीलकर्ता पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की जरूरत है और उसी के अनुसार किशोर न्याय बोर्ड को मामले का ट्रायल नियमित कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था। इस कानूनी लड़ाई का मुख्य आधार सजा तय करने की परिभाषाओं से जुड़ी एक तकनीकी बात थी। जेजे एक्ट के तहत, जघन्य अपराध वे होते हैं जिनमें कम से कम सात साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान होता है। नाबालिग के वकील का तर्क था कि चूंकि भारतीय दंड संहिता की धारा 302 में मौत या उम्रकैद की सजा का प्रावधान है, लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से कम से कम शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है, इसलिए हत्या को जघन्य के बजाय गंभीर अपराध के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए जस्टिस पारदीवाला ने कहा, उम्रकैद, जरूरी तौर पर, हत्या के लिए कम से कम सजा है क्योंकि अदालतें धारा 302 के तहत दोषी ठहराए जाने पर उम्रकैद से कम सजा नहीं दे सकतीं। इसलिए इसे जघन्य अपराध के तौर पर वर्गीकृत किया जाएगा।

किशोर न्याय बोर्ड ने लिया था नाबालिग की तरह केस चलाने का फैसला
किशोर न्याय बोर्ड ने शुरू में फैसला किया था कि बच्चे का मुकदमा बोर्ड की ओर से बतौर नाबालिग ही चलाया जाए, लेकिन अपीलीय सत्र न्यायालय ने उस फैसले को पलट दिया। बाद में हाईकोर्ट ने किशोर पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के फैसले को बरकरार रखा। किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम में संदर्भित गंभीर अपराध की श्रेणी केवल वहीं लागू होती है जहां कानून में कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है या न्यूनतम सजा सात वर्ष से कम है। धारा 302 जघन्य अपराध की स्पष्ट परिभाषा में आती है क्योंकि सजा आजीवन कारावास से कम नहीं हो सकती।


हर मामले में मनोवैज्ञानिक की सलाह अनिवार्य नहीं
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101(2) के तहत, प्रारंभिक मूल्यांकन के विरुद्ध अपील की सुनवाई करने वाले सत्र अदालत के लिए हर मामले में मनोवैज्ञानिकों या चिकित्सा विशेषज्ञों से नई सलाह प्राप्त करना अनिवार्य नहीं है। इस अधिनियम के प्रावधान में 'सकता है' शब्द विवेकाधिकार प्रदान करता है, और विशेषज्ञ सहायता अलग-अलग मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर मांगी जानी चाहिए, न कि एक सार्वभौमिक आवश्यकता के रूप में।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed