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CBSE: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से मांगा जवाब, रोका था सऊदी अरब में रहने वाले 12वीं के छात्र का परीक्षा परिणाम
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 08 Jun 2026 03:45 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरब में रहने वाले सीबीएसई बोर्ड के कक्षा 12 के एक छात्र की याचिका पर बोर्ड और उसके दुबई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को नोटिस जारी किया है। छात्र का परिणाम अब तक घोषित नहीं हुआ है, जबकि पश्चिम एशिया में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित विद्यार्थियों के लिए विशेष मूल्यांकन व्यवस्था बनाई गई थी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 जून को तय की है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सऊदी अरब में रहने वाले कक्षा 12 के एक छात्र की याचिका पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और उसके दुबई स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया। छात्र ने अपना परिणाम घोषित किए जाने की मांग की है, जो पश्चिम एशियाई देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाए जाने के बावजूद अब तक रोका गया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने सीबीएसई और उसके दुबई के क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 जून को तय की। सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल का मूल्यांकन संबंधित स्कूल द्वारा किया जाना जरूरी था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने निजी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दी थी, इसलिए ऐसा कोई मूल्यांकन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
ये भी पढ़ें: 'मूल' से अलग तृणमूल बनाने का इतिहास: जिसे छोड़कर ममता ने टीएमसी बनाई, अब उसी में विलय की क्यों मिली नसीहत?
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12 जून को होगी मामले की अगली सुनवाई
इस पर न्यायमूर्ति मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड पर विचार किया जा सकता है और सीबीएसई के वकील से शुक्रवार तक इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा। सीबीएसई के वकील ने अदालत को बताया कि बोर्ड पहले से ही इस मुद्दे पर काम कर रहा है और सोमवार तक का समय मांगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले को 12 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने कहा है कि परिणाम घोषित नहीं होने से उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं और उन्हें प्रवेश के अवसरों से वंचित होना पड़ा है। याचिका के अनुसार, पटेल ने सऊदी अरब के अल जुबैल से सीबीएसई कक्षा 12 सुधार परीक्षा 2026 में निजी परीक्षार्थी के रूप में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषयों की परीक्षा दी थी।
छात्र को नहीं मिला सीबीएसई से कोई जवाब
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा अवधि के दौरान खाड़ी क्षेत्र में युद्ध संबंधी तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण सीबीएसई ने गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान सहित कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। पश्चिम एशियाई देशों में छात्रों को हुई परेशानी को देखते हुए सीबीएसई ने 27 मार्च को प्रभावित क्षेत्र के कक्षा 12 के परिणाम घोषित करने के लिए एक मूल्यांकन योजना जारी की थी। इस योजना में त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन का प्रावधान था। साथ ही जरूरत पड़ने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने की भी व्यवस्था की गई थी।
हालांकि, जब सीबीएसई ने 13 मई को कक्षा 12 के नतीजे घोषित किए, तब याचिकाकर्ता का परिणाम जारी नहीं किया गया और उसकी स्थिति "आर. एल. (रिजल्ट लेटर)" दिखाई गई। याचिका में कहा गया है कि मूल्यांकन योजना के तहत परिणाम घोषित करने या विशेष परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए सीबीएसई को कई बार अनुरोध भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और परिणाम अब भी रोका हुआ है।
संकट में छात्र का भविष्य
याचिका में कहा गया है कि परिणाम जारी न होने से याचिकाकर्ता के शैक्षणिक भविष्य को गंभीर नुकसान पहुंचा है। वह बी.टेक कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है और अन्य संस्थानों में भी आवेदन नहीं कर पाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों की कार्रवाई मनमानी, अनुचित और भेदभावपूर्ण है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
ये भी पढ़ें: Signature Mismatch Case: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने CID को भेजा जवाब, कार्यालय में पेश होने के लिए मांगा समय
अधिवक्ता विनीत जिंदल के माध्यम से दायर याचिका में अदालत से सीबीएसई को पश्चिम एशियाई देशों के लिए जारी मूल्यांकन योजना लागू करते हुए कक्षा 12 सुधार परीक्षा का परिणाम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। वैकल्पिक रूप से याचिका में रद्द किए गए विषयों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने और उससे संबंधित अन्य राहत प्रदान करने का भी अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने सीबीएसई और उसके दुबई के क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 जून को तय की। सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल का मूल्यांकन संबंधित स्कूल द्वारा किया जाना जरूरी था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने निजी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दी थी, इसलिए ऐसा कोई मूल्यांकन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
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इस पर न्यायमूर्ति मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड पर विचार किया जा सकता है और सीबीएसई के वकील से शुक्रवार तक इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा। सीबीएसई के वकील ने अदालत को बताया कि बोर्ड पहले से ही इस मुद्दे पर काम कर रहा है और सोमवार तक का समय मांगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले को 12 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने कहा है कि परिणाम घोषित नहीं होने से उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं और उन्हें प्रवेश के अवसरों से वंचित होना पड़ा है। याचिका के अनुसार, पटेल ने सऊदी अरब के अल जुबैल से सीबीएसई कक्षा 12 सुधार परीक्षा 2026 में निजी परीक्षार्थी के रूप में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषयों की परीक्षा दी थी।
छात्र को नहीं मिला सीबीएसई से कोई जवाब
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा अवधि के दौरान खाड़ी क्षेत्र में युद्ध संबंधी तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण सीबीएसई ने गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान सहित कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। पश्चिम एशियाई देशों में छात्रों को हुई परेशानी को देखते हुए सीबीएसई ने 27 मार्च को प्रभावित क्षेत्र के कक्षा 12 के परिणाम घोषित करने के लिए एक मूल्यांकन योजना जारी की थी। इस योजना में त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन का प्रावधान था। साथ ही जरूरत पड़ने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने की भी व्यवस्था की गई थी।
हालांकि, जब सीबीएसई ने 13 मई को कक्षा 12 के नतीजे घोषित किए, तब याचिकाकर्ता का परिणाम जारी नहीं किया गया और उसकी स्थिति "आर. एल. (रिजल्ट लेटर)" दिखाई गई। याचिका में कहा गया है कि मूल्यांकन योजना के तहत परिणाम घोषित करने या विशेष परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए सीबीएसई को कई बार अनुरोध भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और परिणाम अब भी रोका हुआ है।
संकट में छात्र का भविष्य
याचिका में कहा गया है कि परिणाम जारी न होने से याचिकाकर्ता के शैक्षणिक भविष्य को गंभीर नुकसान पहुंचा है। वह बी.टेक कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है और अन्य संस्थानों में भी आवेदन नहीं कर पाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों की कार्रवाई मनमानी, अनुचित और भेदभावपूर्ण है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
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