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सुप्रीम कोर्ट सख्त: सीजेआई पर टिप्पणी करने पर संजय राउत और निखिल वागले को नोटिस; जानें क्या है पूरा मामला

Fri, 16 Oct 2026 01:14 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 16 Oct 2026 01:14 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश पर की गई टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संस्थाओं पर हमलों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि न्यायपालिका निजी स्वतंत्रता तथा मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में कभी पीछे नहीं रही है। 

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Supreme Court takes strict stance Notices issued to Sanjay Raut and Nikhil Wagle over remarks about CJI
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुख्य न्यायाधीश (सीजेई) पर की गई टिप्पणियों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। साथ ही, अदालत ने न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि किसी संस्था पर इस तरह के हमले बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जारी किया नोटिस?
संजय राउत और निखिल वागले की ओर से मुख्य न्यायाधीश पर की गई टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अवमानना याचिका दायर की है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के खिलाफ नोटिस जारी किया। अदालत को इस मामले में उनके बयानों पर विचार करना है। हालांकि, अगली सुनवाई पर दोनों को खुद अदालत में मौजूद रहने से छूट दे दी गई है।
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न्यायपालिका पर हमले को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी संस्था पर इस तरह के हमले बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अदालत की यह टिप्पणी संजय राउत और निखिल वागले की ओर से CJI को लेकर की गई टिप्पणियों के संदर्भ में आई। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि संस्थाओं के प्रति टिप्पणी करते समय उनकी गरिमा और संवैधानिक भूमिका का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की रक्षा पर भी दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतें निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में कभी पीछे नहीं रही हैं। अदालत की इस टिप्पणी का मकसद न्यायपालिका की उस भूमिका को रेखांकित करना था, जिसके तहत वह नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करती है। निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के अहम आधार हैं और उनकी रक्षा करना अदालतों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।


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अगली सुनवाई पर क्या होगा?
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है। हालांकि, अवमानना याचिका पर कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले में आगे क्या रुख सामने आता है, यह अगली सुनवाई और अदालत के समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा।

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