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दिल्ली दंगों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: उमर खालिद को नहीं मिली राहत, समीक्षा की मांग वाली याचिका भी हुई खारिज

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 20 Apr 2026 07:00 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की जमानत से जुड़े फैसले की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों में प्रथम दृष्टया दम है और फैसले में बदलाव का कोई आधार नहीं है। खुली सुनवाई की मांग भी ठुकरा दी गई।

Supreme Court Takes Strict Stance on Delhi Riots No Relief for Umar Khalid Review Petition Dismissed
उमर खालिद - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कार्यकर्ता उमर खालिद की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जमानत से इनकार के फैसले की समीक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने साफ कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोपों में प्रथम दृष्टया आधार नजर आता है। इस फैसले से साफ हो गया है कि फिलहाल उमर खालिद को राहत नहीं मिलेगी।

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने 16 अप्रैल के आदेश में कहा कि समीक्षा याचिका में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे 5 जनवरी 2026 के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका में पेश दस्तावेजों को देखने के बाद उन्हें फैसले में किसी गलती या अन्याय का कारण नहीं मिला। साथ ही, खुली अदालत में सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर अपना रुख बरकरार रखा
कोर्ट ने साफ किया कि पहले दिए गए फैसले में कोई बदलाव की जरूरत नहीं है। 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत का मानना था कि दोनों मामलों में आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया साजिश का आधार बनता है। इस कारण कोर्ट ने अपना रुख कायम रखा है।

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दंगों की साजिश में भूमिका पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में ऐसे तथ्य हैं, जो यह मानने के लिए पर्याप्त हैं कि आरोपों में दम है। यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध के दौरान भड़की थी।

अन्य आरोपियों को जमानत पर क्या अपडेट?
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 11 लोगों को अब तक जमानत मिल चुकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा था कि सभी आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं है, इसलिए हर मामले को अलग-अलग देखा जाएगा। इसी आधार पर कुछ को राहत मिली, जबकि कुछ को नहीं।

खुली सुनवाई की मांग भी खारिज
उमर खालिद की ओर से रिव्यू याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी खारिज कर दिया। अदालत ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि समीक्षा याचिकाएं आमतौर पर चेंबर में ही सुनी जाती हैं और इसमें खुली सुनवाई जरूरी नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि दिल्ली दंगों जैसे गंभीर मामलों में अदालत सख्त रुख अपना रही है। आने वाले समय में इस केस की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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