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Supreme Court: बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी की याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक टली, पंजाब जेल शिफ्ट की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 17 Feb 2026 12:52 PM IST
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Supreme Court Updates 17 February 2026: Hearing on Jagtar Singh Hawara Plea and others Details
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में पंजाब के मुख्य मंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा  की याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक स्थगित कर दी। हवारा ने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरण की मांग की है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर मामले को आगे की तारीख तक टाल दिया।

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हवारा की दलील क्या है?
याचिका में कहा गया है कि हवारा पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के निवासी हैं और उनके खिलाफ दिल्ली में कोई मामला लंबित नहीं है, इसलिए उन्हें पंजाब की जेल में रखा जाना चाहिए। याचिका में यह भी दावा किया गया कि जेल में उनका आचरण पिछले 19 वर्षों से संतोषजनक रहा है। 
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हालांकि, 2004 में एक बार जेल से फरार होने की घटना का उल्लेख भी किया गया है। हवारा ने यह भी कहा कि समान मामले में दोषी एक अन्य कैदी को तिहाड़ से चंडीगढ़ जेल स्थानांतरित किया जा चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हवारा और अभियोजन पक्ष, दोनों की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

1995 के विस्फोट मामले में उम्रकैद
हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के बाहर हुए बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इस हमले में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। मार्च 2007 में ट्रायल कोर्ट ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अक्तूबर 2010 में आजीवन कारावास में बदल दिया। अदालत ने आदेश दिया था कि उन्हें जीवन भर जेल में ही रहना होगा।

देवघर कोषागार घोटाला: लालू यादव को मिली जमानत के खिलाफ CBI की याचिका पर सुनवाई टली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देवघर कोषागार घोटाले से जुड़े मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत के खिलाफ CBI की अपील पर सुनवाई 22 अप्रैल तक स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि मामले में अभी सभी दस्तावेज पूरे नहीं हैं और कुछ आरोपियों का निधन भी हो चुका है, इसलिए अगली तारीख अप्रैल में दी जा रही है।

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि झारखंड हाईकोर्ट का आदेश कानून के विपरीत है और सजा निलंबित करना गलत है। वहीं लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि कुछ आरोपियों को नोटिस तक नहीं मिला है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी पक्ष इस विशेष अनुमति याचिका के मुद्दों से अवगत हैं और अधिकांश आरोपी 60, 70 और 80 वर्ष की आयु के हैं। जिन मामलों में प्रतिवादी का निधन हो चुका है, उन्हें बंद किया जाएगा।
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