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Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को NGT की मंजूरी; भारत के लिए क्यों अहम? जानें विरोध की वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 17 Feb 2026 01:35 PM IST
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सार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल और संबंधित परियोजनाओं को मंजूरी दी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पर्यावरणीय शर्तों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

NGT Clears Great Nicobar Infrastructure Project, Cites Adequate Environmental Safeguards
एनजीटी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल सहित बड़ी अवसंरचना परियोजना को मंजूरी दे दी है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं और हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। कोलकाता स्थित पूर्वी जोनल बेंच, जिसकी अध्यक्षता एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे थे, ने सोमवार को यह आदेश पारित किया
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किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी?
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत:
  • अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल
  • टाउनशिप और क्षेत्रीय विकास
  • 450 MVA गैस और सौर आधारित पावर प्लांट
पर्यावरणीय मंजूरी को पहले भी चुनौती दी गई थी, जिसमें आईलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन (ICRZ) नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

क्या बोले एनजीटी?
एनजीटी ने कहा कि पहले दौर की सुनवाई में भी पर्यावरणीय मंजूरी में हस्तक्षेप से इनकार किया गया था और जिन मुद्दों की पहचान की गई थी, उन्हें उच्चस्तरीय समिति ने संबोधित किया है। अदालत ने माना कि यह परियोजना राष्ट्रीय और सामरिक दृष्टि से अहम है, लेकिन पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित यह परियोजना भारत की समुद्री और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सख्त निगरानी की जरूरत पर जोर दिया गया है।
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पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर विशेष जोर
एनजीटी ने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति में विशेष रूप से निम्न संरक्षण उपाय शामिल किए गए हैं:
  • लेदरबैक समुद्री कछुए के संरक्षण
  • निकोबार मेगापोड पक्षी
  • खारे पानी के मगरमच्छ
  • निकोबार मकाक और रॉबर क्रैब
  • मैंग्रोव पुनर्स्थापन और कोरल ट्रांसलोकेशन
  • शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के हितों की रक्षा
ट्रिब्यूनल ने यह भी निर्देश दिया कि तटरेखा में किसी प्रकार का कटाव या परिवर्तन न हो और द्वीप के रेतीले समुद्र तट सुरक्षित रहें, क्योंकि ये कछुओं और पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण घोंसला स्थल हैं।

रणनीतिक महत्व और संतुलित दृष्टिकोण
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना का रणनीतिक महत्व नकारा नहीं जा सकता। साथ ही, आईसीआरजेड अधिसूचना की शर्तों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्राधिकरणों को पर्यावरणीय शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।

भारत के लिए ग्रेट निकोबार परियोजना क्या है महत्व
ग्रेट निकोबार मेगा परियोजना भारत के दीर्घकालिक सामरिक और आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रेट निकोबार द्वीप हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

रक्षा दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां बुनियादी ढांचे के विकास से भारत की सैन्य क्षमताएं मजबूत होंगी और हिंद महासागर क्षेत्र में गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी। विशेष रूप से, इस क्षेत्र में बढ़ती सामरिक हलचलों के मद्देनजर यह स्थान भारत को समुद्री सुरक्षा के मामले में अतिरिक्त बढ़त प्रदान कर सकता है। आपदा प्रबंधन या आपातकालीन परिस्थितियों में भी ग्रेट निकोबार की रणनीतिक उपयोगिता बढ़ जाती है। यह स्थान त्वरित सैन्य तैनाती, निगरानी और आवश्यक प्रतिक्रिया के लिए एक सशक्त आधार के रूप में कार्य कर सकता है। कुल मिलाकर, यह परियोजना भारत की समुद्री शक्ति, आर्थिक संभावनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करने की क्षमता रखती है।

सोनिया गांधी समेत कई पर्यावरणविदों ने उठाए थे सवाल
गौरतलब है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई पर्यावरणविदों ने ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उनके अनुसार, इस परियोजना के कारण लाखों पेड़ काटे जा सकते हैं, जिनकी संख्या करीब 8.5 लाख से लेकर 58 लाख तक बताई जा रही है। अगर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाते हैं, तो इससे पूरे इलाके का पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है। जंगल खत्म होंगे, तो वहां रहने वाले जानवरों और पक्षियों पर भी असर पड़ेगा। ग्रेट निकोबार में कोरल रीफ यानी मूंगे की चट्टानें भी पाई जाती हैं, जो समुद्री जीवन के लिए बहुत जरूरी होती हैं। अगर निर्माण कार्य के कारण ये नष्ट हो जाती हैं, तो समुद्री पारिस्थितिकी को बड़ा नुकसान हो सकता है।

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