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Pune Land Scam: पार्थ पवार को मिली बड़ी राहत, जांच समिति ने दी क्लीन चिट; दो अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 17 Feb 2026 03:06 PM IST
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सार
महाराष्ट्र के पुणे जिले की चर्चित जमीन घोटाले में एनसीपी नेता पार्थ पवार को बड़ी राहत मिली है। बता दें कि, जांच समिति ने राज्य के राजस्व मंत्री को रिपोर्ट सौंप दी है, इसमें पार्थ पवार को क्लीन चिट दी गई है। इसके साथ ही समिति ने इस सौदे में शामिल दो अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश भी है।
पुणे जमीन घोटाले में पार्थ पवार को राहत
- फोटो : ANI
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विस्तार
पुणे की बहुचर्चित जमीन खरीद मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) नेता पार्थ पवार को बड़ी राहत मिली है। जांच समिति ने पार्थ पवार को क्लीन चिट देते हुए दो सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
यह भी पढ़ें - Assam: '2014 में ही सीएम बनने वाला था, राहुल के फोन से पलट गई बाजी', CM सरमा ने बताई कांग्रेस छोड़ने की कहानी
सौदे में शामिल दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खरगे की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने पाया कि जमीन सौदे में पार्थ पवार की सीधी अनियमितता साबित नहीं होती, हालांकि सौदे की प्रक्रिया में शामिल दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इस रिपोर्ट में हवेली के तहसीलदार सूर्यकांत येवले और असिस्टेंट रजिस्ट्रार रविंद्र तारू के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। दोनों अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और वे फिलहाल जेल में हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह जमीन पुणे के मुंढवा इलाके में स्थित है, जिसे अजित पवार और सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार की 'अमेडिया' कंपनी ने खरीदा था। आरोप था कि करीब 1800 करोड़ रुपए बाजार मूल्य वाली जमीन मात्र 300 करोड़ रुपए में खरीदी गई और 21 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी भी माफ कर दी गई। मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
जांच समिति ने राजस्व मंत्री को सौंपी रिपोर्ट
विवाद बढ़ने पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सौदे को रद्द करने की घोषणा की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। अब जांच रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंप दी गई है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लगभग 1800 करोड़ रुपए मूल्य की महार वतन जमीन को 300 करोड़ रुपए में खरीदे जाने के आरोपों की जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी।
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सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें
रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। जहां पार्थ पवार को मिली राहत को उनके समर्थक बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं विपक्ष का कहना है कि मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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सौदे में शामिल दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खरगे की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने पाया कि जमीन सौदे में पार्थ पवार की सीधी अनियमितता साबित नहीं होती, हालांकि सौदे की प्रक्रिया में शामिल दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इस रिपोर्ट में हवेली के तहसीलदार सूर्यकांत येवले और असिस्टेंट रजिस्ट्रार रविंद्र तारू के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। दोनों अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और वे फिलहाल जेल में हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह जमीन पुणे के मुंढवा इलाके में स्थित है, जिसे अजित पवार और सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार की 'अमेडिया' कंपनी ने खरीदा था। आरोप था कि करीब 1800 करोड़ रुपए बाजार मूल्य वाली जमीन मात्र 300 करोड़ रुपए में खरीदी गई और 21 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी भी माफ कर दी गई। मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
जांच समिति ने राजस्व मंत्री को सौंपी रिपोर्ट
विवाद बढ़ने पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सौदे को रद्द करने की घोषणा की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। अब जांच रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंप दी गई है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लगभग 1800 करोड़ रुपए मूल्य की महार वतन जमीन को 300 करोड़ रुपए में खरीदे जाने के आरोपों की जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी।
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सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें
रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। जहां पार्थ पवार को मिली राहत को उनके समर्थक बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं विपक्ष का कहना है कि मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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