Supreme Court: 'इस मामले में कोई कार्रवाई बाकी नहीं', कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी के तरफ से दायर याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की तरफ से दायर याचिका को खारिज कर दिया। दरअसल, केंद्र सरकार ने 14 मार्च को वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था। इसके बाद अब दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में कोई कार्रवाई बाकी नहीं है।
इससे पहले इस मामले में कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी हिरासत पर पुनर्विचार किया जा सकता है। बता दें कि वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था, दो दिन बाद लेह में राज्य के दर्जा और छठवें अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में चार लोगों की मौत हो गई थी। इस प्रदर्शन में 45 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिनमें 22 पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट की इमारत के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लगाने की अनुरोध वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने उसकी इमारत के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लगाने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची व जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जाएगा। पीठ ‘बड़ा खतरनाक’ नाम से विख्यात बदरवाद वेणुगोपाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने कहा कि अदालत वर्तमान में एक नए भवन परिसर के निर्माण की प्रक्रिया में है, जहां इस तरह की स्थापत्य और प्रतीकात्मक आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाएगा। सीजेआई ने शुरुआत में कहा, हम एक नया भवन बना रहे हैं। हम उस समय इस पर विचार करेंगे।
जब याचिकाकर्ता ने वर्तमान प्रतिष्ठित भवन की स्थिति का मुद्दा उठाया, तो सीजेआई ने कहा कि प्रशासन इस पर गौर करेगा। सीजेआई ने कहा, इस मुद्दे पर आप याचिका दायर करने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर मुझे लिख सकते थे। व्यक्तिगत रूप से मौजूद याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने मई 2025 में सीजेआई के कार्यालय से संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि उन्हें 27 नवंबर 2025 को उत्तर मिला, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट अपने विशिष्ट प्रतीक चिह्न का इस्तेमाल करता है। इस पर सीजेआई ने कहा कि पिछला प्रशासनिक निर्णय 24 नवंबर 2025 को उनके कार्यकाल की शुरुआत से पहले पारित किया गया था। सीजेआई ने कहा, हम देखेंगे कि क्या करना है। कृपया न्यायिक पक्ष में याचिकाएं दायर न करें।