Supreme Court: यासीन मलिक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टली; पेगासस मामले में 22 अप्रैल को 'सुप्रीम' सुनवाई
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण के 1989 के मामले और 1990 के श्रीनगर गोलीबारी मामले की सुनवाई जम्मू से नई दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक के खिलाफ मुकदमे को जम्मू-कश्मीर से दिल्ली स्थानांतरित करने की सीबीआई की याचिका पर सुनवाई 4 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी है। तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने मामले को स्थगित कर दिया, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपलब्ध नहीं थे। कोर्ट से मामले को रमजान के बाद पोस्ट करने की अपील की गई। इस पर पीठ ने सहमति जताई। शीर्ष अदालत ने पहले मलिक को 7 मार्च को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया था।
सुनवाई जम्मू से नई दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण के 1989 के मामले और 1990 के श्रीनगर गोलीबारी मामले की सुनवाई जम्मू से नई दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है। शीर्ष अदालत ने पहले जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया था कि मलिक और अन्य के खिलाफ दो मामलों की सुनवाई के दौरान जम्मू विशेष अदालत में उचित वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
CBI को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 18 दिसंबर को छह आरोपियों को मामलों की सुनवाई स्थानांतरित करने की सीबीआई की याचिका पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। याचिका उन दो मामलों को लेकर है, जिसमें 25 जनवरी, 1990 को श्रीनगर में भारतीय वायु सेना के चार कर्मियों की हत्या कर दी गई थी और 8 दिसंबर, 1989 को अपहरण हुआ था। प्रतिबंधित जेकेएलएफ के प्रमुख मलिक दोनों मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
'मलिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा'
शीर्ष अदालत जम्मू की एक निचली अदालत के 20 सितंबर, 2022 के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मलिक को अपहरण मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह करने के लिए उसके समक्ष शारीरिक रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था। सीबीआई ने कहा कि मलिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और उसे तिहाड़ जेल परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने जासूसी के लिए इस्राइली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल करने के आरोपों की जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर 22 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह मामला काफी समय बाद आया है और उन्होंने इस पर अप्रैल में सुनवाई करने का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाले मामले में डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटर धीरज वधावन को जमानत देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने वधावन को नोटिस जारी किया और याचिका पर उनका जवाब मांगा।
उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर, 2024 को उन्हें चिकित्सा आधार पर जमानत देते हुए कहा कि वधावन एक "बीमार व्यक्ति" के मापदंडों के अंतर्गत आते हैं। शीर्ष अदालत में दलीलों के दौरान, सीबीआई का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि वधावन को कोई गंभीर चिकित्सा बीमारी नहीं थी और मामले में बड़ी मात्रा में धन की हेराफेरी की गई थी। पीठ ने वधावन को नोटिस जारी किया और सुनवाई 28 अप्रैल के सप्ताह में तय की। इस मामले में वधावन बंधुओं - कपिल और धीरज को जुलाई 2022 में गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी ने अक्तूबर 2022 में आरोपपत्र दाखिल किया जिसके बाद अदालत ने इसका संज्ञान लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार के उस फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के पवित्र महीने में एक घंटा पहले दफ्तरों से निकलने की अनुमति दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी शिकायत लेकर संबंधित उच्च न्यायालयों में जाएं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि याचिका में दोनों सरकारों के परिपत्रों को चुनौती दी गई है। पीठ ने कहा, "कृपया उच्च न्यायालय जाएं।" पीठ द्वारा याचिका की जांच करने में अनिच्छा दिखाने के बाद शंकरनारायणन ने संबंधित उच्च न्यायालयों में जाने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस ले ली। पीठ ने कहा, "याचिकाकर्ता के वकील संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत संबंधित उच्च न्यायालयों में जाने की स्वतंत्रता के साथ वर्तमान याचिका वापस लेने की अनुमति मांगते हैं।" पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत लेकर उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता दी।
तेलंगाना सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर मुस्लिम कर्मचारियों को रमज़ान के दौरान एक घंटा पहले दफ़्तर छोड़ने की अनुमति दी है। इसी तरह, टीडीपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने भी आंध्र प्रदेश में सभी मुस्लिम कर्मचारियों को पवित्र महीने के दौरान 2 मार्च से 30 मार्च तक एक घंटा पहले दफ़्तर छोड़ने की अनुमति दी है।
सात वकीलों को राजस्थान हाईकोर्ट का जज बनाने की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सात वकीलों को राजस्थान हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम ने वकील आनंद शर्मा, सुनील बेनीवाल, संदीप तनेजा, मुकेश राजपुरोहित, संदीप शाह, बलजिंदर सिंह संधू और शीतल मिर्धा को हाईकोर्ट जज बनाने की सिफारिश की है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 5 मार्च की बैठक में केंद्र सरकार से इन सभी वकीलों को जज बनाने की सिफारिश की। इससे पहले इसी 22 जनवरी को तीन वकीलों को राजस्थान हाईकोर्ट का जज बनाने को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी थी। राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के 50 पद स्वीकृत हैं लेकिन अभी 34 ही भरे हुए हैं। यदि केंद्र सरकार इन सभी सात वकीलों के नाम को स्वीकृति दे देती है तो इनके पद संभालने के बाद संख्या 41 हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना पर काम रोकने का आदेश देने से इन्कार कर दिया। मुंबई हाईकोर्ट पहले ही धारावी में बस्तियों के पुनर्विकास का रास्ता साफ कर चुका था। हाईकोर्ट ने परियोजना के लिए अदाणी समूह को मिली निविदा बरकरार रखते हुए कहा था निर्णय में कोई मनमानी, कुछ अनुचित या दुराग्रहपूर्ण नहीं था।
हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और अदाणी प्रॉपर्टीज प्रा. लि. को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई मई के अंतिम सप्ताह में होगी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ यह याचिका सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरेशन ने दायर की है। सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरेशन 2018 में 7,200 करोड़ की पेशकश के साथ सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी, लेकिन बाद में सरकार ने निविदा रद्द कर दी थी। इसके बाद 2022 में अदाणी समूह 5,069 करोड़ की पेशकश के साथ यह निविदा हासिल की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने से इन्कार कर दिया।

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