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Supreme Court: परिवार संग होली मना सकेगा नीतीश कटारा हत्याकांड का दोषी, सुप्रीम कोर्ट ने दी सात दिन की फरलो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Fri, 27 Feb 2026 05:09 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दोषी विकास यादव की याचिका मंजूर की। विकास यादव 2002 में व्यवसायी नीतीश कटारा की हत्या के लिए 25 साल की जेल की सजा काट रहा है। उसने जेल से होली पर परिवार के साथ समय बिताने के लिए रिहाई की मांग की थी।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि विकास यादव ने अब तक 23 साल की सजा पूरी कर ली है। इसलिए उसे सात मार्च तक रिहाई की अनुमति दी गई है। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ होली मना सकेगा। बेंच ने कहा, होली के समय परिवार के साथ समय बिताने के लिए फरलो का आवेदन किया गया है। मामले के मापदंडों में प्रवेश किए बिना हम याचिकाकर्ता को सात मार्च तक फरलो (अस्थायी रिहाई) की अनुमति देते हैं।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने विकास यादव की रिहाई के खिलाफ याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को खारिज किया। बेंच ने कहा, क्या आप उसे फांसी देना चाहते हैं? 23 साल बाद आप अभी भी मामला खड़ा करना चाहते हैं। हमें चीजों को आगे बढ़ने देना चाहिए। जस्टिस सुंदरेश ने मौखिक रूप से कहा कि इस तरह की रिहाई कभी-कभी दोषी के सुधार में मदद कर सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 फरवरी को विकास यादव की 21 दिन की फरलो रिहाई की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि यादव गंभीर अपराधों का दोषी है और दिल्ली जेल नियमावली, 2018 के तहत फरलो रिहाई के लिए कानूनी रूप से अयोग्य है।
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जस्टिस एमएम सुंदरेश और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि विकास यादव ने अब तक 23 साल की सजा पूरी कर ली है। इसलिए उसे सात मार्च तक रिहाई की अनुमति दी गई है। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ होली मना सकेगा। बेंच ने कहा, होली के समय परिवार के साथ समय बिताने के लिए फरलो का आवेदन किया गया है। मामले के मापदंडों में प्रवेश किए बिना हम याचिकाकर्ता को सात मार्च तक फरलो (अस्थायी रिहाई) की अनुमति देते हैं।
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सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने विकास यादव की रिहाई के खिलाफ याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को खारिज किया। बेंच ने कहा, क्या आप उसे फांसी देना चाहते हैं? 23 साल बाद आप अभी भी मामला खड़ा करना चाहते हैं। हमें चीजों को आगे बढ़ने देना चाहिए। जस्टिस सुंदरेश ने मौखिक रूप से कहा कि इस तरह की रिहाई कभी-कभी दोषी के सुधार में मदद कर सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 फरवरी को विकास यादव की 21 दिन की फरलो रिहाई की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि यादव गंभीर अपराधों का दोषी है और दिल्ली जेल नियमावली, 2018 के तहत फरलो रिहाई के लिए कानूनी रूप से अयोग्य है।
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