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Surat: सूरत के मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, जांच में रैगिंग की पुष्टि; चार सीनियर सस्पेंड
Mon, 10 Aug 2026 04:04 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, सूरत
पीटीआई, सूरत
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 10 Aug 2026 04:04 PM IST
सार
सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 30 वर्षीय पीजी रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पांड्या की मौत के मामले में कॉलेज प्रशासन ने चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच समिति ने प्रथम वर्ष के छात्रों की शिकायतों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर गाली-गलौज तथा अपमान को रैगिंग माना। चारों आरोपी डॉक्टरों को छह महीने के लिए निलंबित कर हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया गया है।
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आत्महत्या
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में 30 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर ने कथित तौर पर रैगिंग के बाद आत्महत्या कर ली। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि रैगिंग के दौरान उनके साथ गाली-गलौज और अपमान किया गया था। कॉलेज प्रशासन ने रातभर चली जांच के बाद चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख समेत चार फैकल्टी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
मृतक की पहचान हर्ष पांड्या के रूप में हुई है। वह न्यू सिविल अस्पताल से संबद्ध जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रथम वर्ष के पीजी छात्र थे। रविवार सुबह उनका शव हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला। जीएमसी के डीन डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट ने बताया कि रैगिंग रोधी समिति की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर छात्रों ने हर्ष के साथ गाली-गलौज और अपमान किया था।
रैगिंग में शामिल सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की दी गई क्या सजा?
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि घटना की वैज्ञानिक तरीकों से पूरी जांच की गई है। उन्होंने बताया कि मृतक के पिता भी डॉक्टर हैं और परिवार को न्याय का भरोसा दिया गया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, रैगिंग की घटना में शामिल पाए गए चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों निराली वसावे, अनुज माहेश्वरी, दीक्षिता घेवरिया और हिना भूत को छह महीने के लिए निलंबित किया गया है।
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डॉ. ब्रह्मभट्ट ने बताया कि चारों को तत्काल हॉस्टल खाली करने और निलंबन की अवधि में किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल नहीं होने का आदेश दिया गया है। मामले की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमैया मुल्ला और तीन अन्य फैकल्टी सदस्यों डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
एंटी रैगिंग कमेटी ने दर्ज किए किन-किन लोगों के बयान?
बयान के अनुसार, एंटी रैगिंग कमेटी ने रविवार रात 8:30 बजे से सोमवार सुबह चार बजे तक मैराथन बैठक की। इस दौरान नौ प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों और मृतक के पिता की शिकायतों के आधार पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों, तकनीशियनों और सफाईकर्मियों के बयान दर्ज किए गए।
डॉ. ब्रह्मभट्ट ने कहा, "प्रथम वर्ष के छात्रों की ओर से दर्ज शिकायतों के आधार पर दूसरे, तीसरे वर्ष के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के बयान दर्ज किए गए। इन बयानों को ध्यान में रखते हुए और यह देखते हुए कि यूजीसी के दिशानिर्देशों में गाली-गलौज और अपमान को रैगिंग की श्रेणी में रखा गया है, समिति ने विचार-विमर्श के बाद फैसला किया कि मृतक के साथ रैगिंग की गई थी।"
आरोपों की हुई पुष्टि
उन्होंने कहा, "इस मामले में गाली-गलौज और अपमान की पुष्टि हुई है, लेकिन किसी भी शिकायत में शारीरिक उत्पीड़न का जिक्र या सबूत नहीं मिला। इसलिए रैगिंग की परिभाषा में शामिल इन कृत्यों को ध्यान में रखते हुए रैगिंग रोधी समिति ने फैसला लिया।" रैगिंग रोधी दस्ते और संस्थान के फैकल्टी सदस्यों वाली जांच समिति ने प्रत्येक शिकायत की अलग-अलग जांच की। डीन ने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
उन्होंने कहा, "रैगिंग रोधी समिति के अनुसार, शारीरिक उत्पीड़न या ऐसी हिंसा के कारण मौत होने का कोई सबूत नहीं है। शिकायतों और बयानों के आधार पर इन घटनाओं को मामूली रैगिंग की श्रेणी में रखा जा सकता है और छात्रों पर ऐसे मामलों के लिए निर्धारित उचित कार्रवाई की गई है।"
राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट
कॉलेज काउंसिल ने रैगिंग रोधी समिति की रिपोर्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समीक्षा भी की गई है। आधिकारिक बयान के अनुसार, सोमवार सुबह राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप दी गई। स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने रविवार को कॉलेज प्रशासन को मामले की तत्काल जांच करने का निर्देश दिया था। उन्होंने जरूरत पड़ने पर रातभर जांच कर मृतक के इस कदम की सही वजह पता लगाने को कहा था।
पानशेरिया ने वीडियो बयान में कहा, "यह परिवार के लिए बेहद दुखद घटना है। आत्महत्या की वैज्ञानिक तरीकों से पुलिस टीम, फोरेंसिक विशेषज्ञों और मेडिकल पैनल ने पूरी जांच की है। मृतक के पिता भी डॉक्टर हैं और हमने परिवार को भरोसा दिया है कि न्याय किया जाएगा।" उन्होंने कहा, "हमने रैगिंग रोधी समिति, अधीक्षक और डीन समेत अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे रातभर सिविल अस्पताल में रहें, जांच पूरी करें और मौत की वजह का पता लगाएं।"
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मृतक की पहचान हर्ष पांड्या के रूप में हुई है। वह न्यू सिविल अस्पताल से संबद्ध जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रथम वर्ष के पीजी छात्र थे। रविवार सुबह उनका शव हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला। जीएमसी के डीन डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट ने बताया कि रैगिंग रोधी समिति की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर छात्रों ने हर्ष के साथ गाली-गलौज और अपमान किया था।
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रैगिंग में शामिल सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की दी गई क्या सजा?
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि घटना की वैज्ञानिक तरीकों से पूरी जांच की गई है। उन्होंने बताया कि मृतक के पिता भी डॉक्टर हैं और परिवार को न्याय का भरोसा दिया गया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, रैगिंग की घटना में शामिल पाए गए चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों निराली वसावे, अनुज माहेश्वरी, दीक्षिता घेवरिया और हिना भूत को छह महीने के लिए निलंबित किया गया है।
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डॉ. ब्रह्मभट्ट ने बताया कि चारों को तत्काल हॉस्टल खाली करने और निलंबन की अवधि में किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल नहीं होने का आदेश दिया गया है। मामले की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमैया मुल्ला और तीन अन्य फैकल्टी सदस्यों डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
एंटी रैगिंग कमेटी ने दर्ज किए किन-किन लोगों के बयान?
बयान के अनुसार, एंटी रैगिंग कमेटी ने रविवार रात 8:30 बजे से सोमवार सुबह चार बजे तक मैराथन बैठक की। इस दौरान नौ प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों और मृतक के पिता की शिकायतों के आधार पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों, तकनीशियनों और सफाईकर्मियों के बयान दर्ज किए गए।
डॉ. ब्रह्मभट्ट ने कहा, "प्रथम वर्ष के छात्रों की ओर से दर्ज शिकायतों के आधार पर दूसरे, तीसरे वर्ष के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के बयान दर्ज किए गए। इन बयानों को ध्यान में रखते हुए और यह देखते हुए कि यूजीसी के दिशानिर्देशों में गाली-गलौज और अपमान को रैगिंग की श्रेणी में रखा गया है, समिति ने विचार-विमर्श के बाद फैसला किया कि मृतक के साथ रैगिंग की गई थी।"
आरोपों की हुई पुष्टि
उन्होंने कहा, "इस मामले में गाली-गलौज और अपमान की पुष्टि हुई है, लेकिन किसी भी शिकायत में शारीरिक उत्पीड़न का जिक्र या सबूत नहीं मिला। इसलिए रैगिंग की परिभाषा में शामिल इन कृत्यों को ध्यान में रखते हुए रैगिंग रोधी समिति ने फैसला लिया।" रैगिंग रोधी दस्ते और संस्थान के फैकल्टी सदस्यों वाली जांच समिति ने प्रत्येक शिकायत की अलग-अलग जांच की। डीन ने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
उन्होंने कहा, "रैगिंग रोधी समिति के अनुसार, शारीरिक उत्पीड़न या ऐसी हिंसा के कारण मौत होने का कोई सबूत नहीं है। शिकायतों और बयानों के आधार पर इन घटनाओं को मामूली रैगिंग की श्रेणी में रखा जा सकता है और छात्रों पर ऐसे मामलों के लिए निर्धारित उचित कार्रवाई की गई है।"
राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट
कॉलेज काउंसिल ने रैगिंग रोधी समिति की रिपोर्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समीक्षा भी की गई है। आधिकारिक बयान के अनुसार, सोमवार सुबह राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप दी गई। स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने रविवार को कॉलेज प्रशासन को मामले की तत्काल जांच करने का निर्देश दिया था। उन्होंने जरूरत पड़ने पर रातभर जांच कर मृतक के इस कदम की सही वजह पता लगाने को कहा था।
पानशेरिया ने वीडियो बयान में कहा, "यह परिवार के लिए बेहद दुखद घटना है। आत्महत्या की वैज्ञानिक तरीकों से पुलिस टीम, फोरेंसिक विशेषज्ञों और मेडिकल पैनल ने पूरी जांच की है। मृतक के पिता भी डॉक्टर हैं और हमने परिवार को भरोसा दिया है कि न्याय किया जाएगा।" उन्होंने कहा, "हमने रैगिंग रोधी समिति, अधीक्षक और डीन समेत अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे रातभर सिविल अस्पताल में रहें, जांच पूरी करें और मौत की वजह का पता लगाएं।"