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मेकेदातु बांध विवाद पर CM विजय सख्त: अधिकारियों संग की समीक्षा बैठक; कानूनी कार्रवाई तेज करने के दिए निर्देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 25 May 2026 03:25 PM IST
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सार

कावेरी नदी जल विवाद के बीच मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार को इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।

Tamil Nadu CM Vijay Orders Fast-Track Legal Action Against Karnataka Mekedatu Dam Project
विजय, मुख्यमंत्री, तमिलनाडु - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

कावेरी नदी को लेकर लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।



सरकारी बयान के मुताबिक, यह बैठक उस समय आयोजित की गई जब कर्नाटक में मेकेदातु परियोजना के लिए भूमि पूजन किए जाने की खबर सामने आई। तमिलनाडु सरकार पहले से ही इस परियोजना का विरोध करती रही है और उसका कहना है कि इससे राज्य के किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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बैठक में कावेरी जल विवाद से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों और हालिया फैसलों की जानकारी दी। बताया गया कि शीर्ष अदालत पहले तमिलनाडु की पुनर्विचार याचिका खारिज कर चुकी है, जिसमें यह कहा गया था कि इस मामले में तकनीकी और कानूनी निर्णय लेने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के विशेषज्ञों के पास है। मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों से कहा कि अदालत के हालिया फैसलों को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा और किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए कानूनी कदमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
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दरअसल, कर्नाटक सरकार कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक बैलेंसिंग रिजर्वायर बनाने की योजना पर काम कर रही है। राज्य सरकार का दावा है कि इस परियोजना से बेंगलुरु समेत कई इलाकों की पेयजल जरूरतें पूरी होंगी और बिजली उत्पादन में भी मदद मिलेगी। हालांकि, निचले तटीय राज्य तमिलनाडु का कहना है कि यदि यह परियोजना लागू होती है तो राज्य को मिलने वाले पानी की मात्रा प्रभावित हो सकती है। इससे कृषि क्षेत्र और लाखों किसानों पर असर पड़ने की आशंका है। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कानूनी रणनीति और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

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