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कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में तमिलनाडु सरकार; कर्नाटक पर लगाए क्या आरोप?
Fri, 31 Jul 2026 02:07 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, चेन्नई।
पीटीआई, चेन्नई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:07 PM IST
सार
तमिलनाडु सरकार ने कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कावेरी प्रबंधन आयोग के निर्देशों की अनदेखी से नाराज तमिलनाडु अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रहे हैं और अगले एक सप्ताह में राज्य सरकार अपनी अंतिम रणनीति का औपचारिक एलान करेगी।
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कावेरी जल विवाद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दक्षिण भारत के दो बड़े राज्यों तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने हिस्से का पानी पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने शुक्रवार को कहा कि कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद अब कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।
कानून मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु को कानून के अनुसार जितना पानी मिलना चाहिए, वह हर हाल में मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, इसलिए सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।
कर्नाटक पर आदेश नहीं मानने का आरोप
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण जब भी कर्नाटक को तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देता है, तब भी उसका पालन नहीं किया जाता। राज्य का आरोप है कि इससे तमिलनाडु के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने कहा कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री कर रहे हैं लगातार बैठकें
कानून मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय इस पूरे मामले पर लगातार समीक्षा कर रहे हैं। वह कानूनी विशेषज्ञों, जल विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि अदालत में मजबूत पक्ष रखा जा सके। सरकार अगले एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत कानूनी रणनीति का भी एलान कर सकती है।
यह भी पढ़ें: कौन हैं अरुण श्रीनिवास: जिन पर PM मोदी के AI वीडियो मामले में FIR दर्ज, कैसे IIM से मेटा इंडिया तक पहुंचे?
किन विकल्पों पर विचार कर रही सरकार?
तमिलनाडु सरकार फिलहाल कई विकल्पों पर काम कर रही है। इनमें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग, जल बंटवारे से जुड़े कानूनी उपायों को मजबूत करना, कर्नाटक के साथ बातचीत की संभावना तलाशना और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करना शामिल है।
क्या है कावेरी जल विवाद?
कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था और बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो जरूरत के अनुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है। हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर फिर से विवाद का कारण बन जाता है।
अब तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अगले कदम और दोनों राज्यों के रुख पर पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।
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कानून मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु को कानून के अनुसार जितना पानी मिलना चाहिए, वह हर हाल में मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, इसलिए सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।
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कर्नाटक पर आदेश नहीं मानने का आरोप
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण जब भी कर्नाटक को तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देता है, तब भी उसका पालन नहीं किया जाता। राज्य का आरोप है कि इससे तमिलनाडु के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने कहा कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री कर रहे हैं लगातार बैठकें
कानून मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय इस पूरे मामले पर लगातार समीक्षा कर रहे हैं। वह कानूनी विशेषज्ञों, जल विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि अदालत में मजबूत पक्ष रखा जा सके। सरकार अगले एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत कानूनी रणनीति का भी एलान कर सकती है।
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किन विकल्पों पर विचार कर रही सरकार?
तमिलनाडु सरकार फिलहाल कई विकल्पों पर काम कर रही है। इनमें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग, जल बंटवारे से जुड़े कानूनी उपायों को मजबूत करना, कर्नाटक के साथ बातचीत की संभावना तलाशना और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करना शामिल है।
क्या है कावेरी जल विवाद?
कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था और बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो जरूरत के अनुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है। हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर फिर से विवाद का कारण बन जाता है।
अब तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अगले कदम और दोनों राज्यों के रुख पर पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।