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TCS Case: हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर दफ्तर में घुसी पुलिस, ऐसे किया दुष्कर्म और धर्मांतरण की साजिश का भंडाफोड़

न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, नासिक Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 16 Apr 2026 12:51 AM IST
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सार

आरोप है कि आरोपियों ने महिला कर्मचारियों से शारीरिक संबंध बनाने के साथ ही, नमाज पढ़ने, रोजा रखने और मांसाहार करने के अलावा धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। 

TCS nashik Case Police Enter Office Posing as Housekeeping Staff Here Is How They Busted the Conspiracy
टीसीएस नासिक - फोटो : एएनआई
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विस्तार

टीसीएस की नासिक इकाई में यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के मामले की एसआईटी जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि टीसीएस नासिक की एचआर मैनेजर निदा खान ने कर्मचारियों के 70 शिकायती मैसेज अनदेखे किए थे। साथ ही इस मामले के तार विदेश से जुड़ते दिख रहे हैं। एचआर मैनेजर निदा खान के आतंकी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। 
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एचआर मैनेजर निदा खान मुख्य साजिशकर्ता
एसआईटी के मुताबिक एचआर मैनेजर निदा खान ही मुख्य साजिशकर्ता हैं, जिन्होंने शिकायत को दबाने और आरोपी को बचाने की कोशिश की। जांच के दौरान, पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों के बीच हुई लगभग 78 संदिग्ध कॉल, ईमेल और चैट के रिकॉर्ड बरामद किए। पुलिस को संभावित वित्तीय लेन-देन के भी सबूत मिले हैं। निदा खान ने पीड़ितों को बार-बार मामला भुलाने को कहा और कार्यालय में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का सदस्य होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 
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एसआईटी को एक व्हाट्सएप चैट मिली है जिसमें आरोपियों से मलेशिया के कुछ संदिग्ध उपदेशक के लिंक का भी पता चला है। एसआईटी की जांच में मिले डिजिटल साक्ष्य से यह सारी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि टीसीएस दफ्तर के भीतर एक से कहीं अधिक नेटवर्क संचालित हो रहा था। पुलिस ने उन व्हाट्सएप ग्रुपो का पता लगाया है जिनका इस्तेमाल आरोपी कथित तौर पर सहकर्मियों के बारे में चर्चा करने, लक्ष्य निर्धारित करने और कार्रवाई की योजना बनाने के लिए करते थे। फॉरेंसिक उपकरणों की मदद से डिलीट की गई चैट को रिकवर किया जा रहा है जो मामले की जांच में तह तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकता है। एसआईटी ने अब तक ऐसे 12 कर्मचारियों की पहचान की है जो इस रैकेट में शामिल हैं। कई टीम लीडर और इंजीनियर समेत सात आरोपियों आसिफ अंसारी, तौफीक अत्तर, दानिश शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और शफी शेख को गिरफ्तार किया जा चुका है।

हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर टीसीएस के दफ्तर में घुसी पुलिस
पुलिस को फरवरी माह में टीसीएस के ऑफिस में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण संबंधी शिकायत मिली थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने गुप्त अभियान चलाया, जिसके बाद इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ। इस अभियान में महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में टीसीएस के दफ्तर में लगभग दो सप्ताह तक गुप्त रूप से तैनात किया गया था। इन पुलिसकर्मियों ने कर्मचारियों के आपसी व्यवहार पर बारीकी से नजर रखी और इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी जिससे इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ।

एजीएम अश्विनी चैनानी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, तेज हुई निदा खान की तलाश
टीसीएस की एजीएम अश्विनी अशोक चैनानी को बुधवार को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, इस पूरे मामले की मुख्य सूत्रधार मानी जा रही निदा खान अब भी फरार है जिनकी तलाश तेजी से की जा रही है। नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने कहा, जांच में देखा जा रहा है कि क्या आरोपियों को किसी कट्टरपंथी संगठन या विदेशी स्रोत से आर्थिक मदद मिल रही थी। जैसे ही ठोस सबूत मिलेंगे, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी के संपर्क में थीं एजीएम
पुलिस सूत्रों ने बताया कि टीसीएस नासिक शाखा की एसिस्टेंट जनरल मैनेजर मामला दर्ज होने के बाद भी तीसरे आरोपी दानिश शेख के संपर्क में थीं। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने शेख को फोन किया था। एसआईटी कॉल और ईमेल रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के बाद आरोपियों के बीच मिलीभगत की संभावना की भी जांच कर रही है। अब तक कुल 9 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1 मामला देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में और 8 मुंबई नाका में दर्ज हैं। उत्पीड़न, यातना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के साथ कुल 9 शिकायतें दर्ज की गई हैं। ये रैकेट वर्ष 2022 से शुरू होकर अब तक चलता रहा।

महिला आयोग ने जांच के लिए समिति बनाई
राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के लिए एक तथ्य-खोज समिति गठित की है। समिति 17 अप्रैल को संबंधित इकाई का दौरा कर मौके पर जांच करेगी और घटना से जुड़ी परिस्थितियों तथा अधिकारियों की प्रतिक्रिया का आकलन करेगी। चार सदस्यीय समिति में बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस साधना जाधव, पूर्व हरियाणा डीजीपी बीके सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और महिला आयोग की वरिष्ठ समन्वयक लीलाबती शामिल हैं। समिति पीड़ितों, पुलिस और कंपनी प्रतिनिधियों से बातचीत कर संभावित लापरवाहियों की पहचान करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगी। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक उपाय भी सुझाएगी। रिपोर्ट 10 कार्य दिवसों में सौंपी जाएगी।


 
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