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'बहू को सिखाएं पारंपरिक खाना': केरल सीएम सतीशन के बयान पर छिड़ी नई बहस, लैंगिक समानता पर क्यों उठ रहे सवाल?

Mon, 27 Jul 2026 12:54 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 27 Jul 2026 12:54 PM IST
सार

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने माताओं से पारंपरिक व्यंजन अपने बच्चों या बेटे की वी पत्नी को सिखाने की अपील की। इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें पितृसत्तात्मक और महिला विरोधी बताते हुए आलोचना की। उनका कहना है कि घरेलू जिम्मेदारियां महिला-पुरुष दोनों की समान होनी चाहिए।

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Teach daughter-in-law cooking Fresh debate Kerala CM Satheesan statement why questions raised gender equality?
वीडी सतीशन, केरल के मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सोशल मीडिया पर इन दिनों केरल के मुख्यमंत्री वी.डी सतीशन की आलोचना की जा रही है। उन्होंने यूजर महिला विरोधी बता रहे हैं। वजह है उनकी एक टिप्पणी। दरअसल, उन्होंने हाल ही में माताओं को अपने बेटों की बेटों की पत्नियों को पारंपरिक खान-पान की परंपराएं सिखानी चाहिए। 

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क्या है पूरा मामला?
शनिवार को चेंगन्नूर में पम्पा संवाद महोत्सव को संबोधित करते हुए सतीशन ने कहा, 'मुझे कुछ माताओं से शिकायत है। उनमें कुछ पारंपरिक व्यंजन बनाने की विशेष प्रतिभा होती है, जिन्हें केवल वे ही बनाना जानती हैं। लेकिन वे उन व्यंजनों को अपने बच्चों को नहीं सिखातीं।' उन्होंने आगे कहा, 'कम से कम उन्हें ये व्यंजन या तो अपने बच्चों को या फिर अपने बेटे की भावी पत्नी को सिखाने चाहिए। इस तरह इन व्यंजनों की विशिष्टता अगली पीढ़ी तक पहुंच सकेगी।'

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विपक्ष ने क्या कहा? 
पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता वी. शिवनकुट्टी ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे केरल के स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रचारित लैंगिक समानता के मूल्यों के विपरीत हैं। फेसबुक पोस्ट में सिवानकुट्टी ने कहा, 'हमने पाठ्यपुस्तकों में एक बदलाव किया है कि हर किसी को, चाहे वह पुरुष हो या महिला, घर के काम करने चाहिए। फिर भी।'

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पूर्व मंत्री ने कहा कि घरेलू जिम्मेदारियों का बंटवारा लिंग के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि लड़कों और लड़कियों को समान रूप से घरेलू काम में हिस्सेदारी करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन किया गया था।

लेखिका एस सरदाकुट्टी ने क्या कहा? 
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, लेखिका एस सरदाकुट्टी ने सतीशन की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए उन्हें पितृसत्तात्मक बताया। इसके साथ ही कहा कि उन्होंने पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध को नजरअंदाज किया है।

उन्होंने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए महिला नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया। एक कविता साझा की जो प्रतीकात्मक रूप से महिलाओं पर थोपे गए घरेलू बोझ के अंतरपीढ़ीगत हस्तांतरण को अस्वीकार करती है।

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