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Gujarat Riots: फर्जी सबूत मामले में FIR रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचीं सीतलवाड़, सत्र अदालत से नहीं मिली थी राहत

Tue, 01 Aug 2023 01:38 AM IST
गुलाम अहमद पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 01 Aug 2023 01:38 AM IST
सार

गुजरात दंगा मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों को फंसाने के लिए झूठे साक्ष्य तैयार करने के आरोप में पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड़ के साथ ही राज्य के पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट को पिछले साल जून में गिरफ्तार किया था।

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Teesta Setalvad moves Gujarat High Court to quash FIR against her for fabricating evidence in 2002 riots cases
Teesta Setalvad - फोटो : twitter

विस्तार

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 2002 के दंगों के संबंध में फर्जी सबूत तैयार करने के मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। अहमदाबाद पुलिस की अपराध साखा ने सीतलवाड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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सत्र अदालत ने हाल ही में सीतलवाड़ की आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने सोमवार को हाईकोर्ट में अपील की, जिस पर अगले कुछ दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। इस मामले में तीस्ता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली हुई है।
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गुजरात दंगा मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों को फंसाने के लिए झूठे साक्ष्य तैयार करने के आरोप में पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड़ के साथ ही राज्य के पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट को पिछले साल जून में गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट से जकिया जाफरी की याचिका खारिज करने के बाद पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जकिया जाफरी के पति और पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी गुजरात दंगों के दौरान मारे गए थे।
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सीतलवाड़ पर आईपीसी की धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 194 (मौत की सजा दिलाने के इरादे से झूठे सबूत देना या गढ़ना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जकिया जाफरी की याचिका में वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए दंगों के पीछे साजिश में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की संलिप्तता होने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी और 63 अन्य को एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हमें ऐसा लगता है कि गुजरात सरकार के असंतुष्ट अधिकारियों के साथ-साथ अन्य लोगों ने झूठे दावे कर सनसनी पैदा करने का प्रयास किया था। एसआईटी ने गहन जांच के बाद उनके झूठ को पूरी तरह से उजागर कर दिया... वास्तव में, प्रक्रिया के इस तरह के दुरुपयोग में शामिल सभी लोगों को कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।

गोधरा में ट्रेन जलाने के दोषियों की जमानत पर सुनवाई
वहीं, गुजरात के गोधरा में 2002 में ट्रेन में आग लगाने के दोषियों की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। इस घटना के बाद ही राज्य में दंगा भड़क उठा था। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाली और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने कहा कि याचिका पर 1 अगस्त को सुनवाई होगी। पीठ ने कहा, हमने मामलों को चार समूहों में बांटा है। पहले समूह में वो मामले में हैं जिनमें हाईकोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद की सजा में बदल दिया है। दूसरा समूह उन दोषियों का है जिन्हें एक विशिष्ट भूमिका निभानी है, जिन्हें हमने गैर जमानत कहा है। तीसरे समूह में उन दोषियों के मामले हैं जो घटना स्थल के आसपास उपस्थित थे और भीड़ का हिस्सा थे। चौथे समूह में बुजुर्गों के मामले हैं जो कुछ तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। एक सजायाफ्ता की पत्नी को कैंसर है।


गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने कहा कि वे दोषियों की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े को सूची उपलब्ध कराए। शीर्ष अदालत ने 21 अप्रैल को गोधरा में ट्रेन जलाने के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे आठ दोषियों को जमानत दे दी थी।

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